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दो सौ करोड़ के टेंडर महीनों से लटक रहे

सड़क निर्माण के दो सौ करोड़ से अधिक के टेंडर महीनों से लटक रहे हैं। लिहाजा बड़ी और महत्वपूर्ण योजनाओं पर काम शुरू नहीं हो रहा। हाारीबाग- बड़कागांव- टंडवा सड़क के लिए चौथी बार टेंडर मांगा गया है। यह योजना 2007-08 की है। छह महीने से टेंडर में ही योजना फंसी है। दो दिन पहले ही डालटनगंज-पांकी सड़क के लिए री टेंडर करने का फैसला हुआ है। इन सड़कों की जर्जर हालत के कारण विरोध भी जमकर हो रहा है। 1.66 करोड़ की लागत से बनने वाली आसनबनी- पटमदा सड़क का री टेंडर 28 मई को हुआ है। हाारीबाग- कटकमसांडी- चतरा (2किमी) सड़क का भी री टेंडर हुआ है। इसके अलावा कई और टेंडर हैं, जो महीनों से लटक रहे हैं।ड्ढr री टेंडर के कई कारण हैं। उग्रवाद प्रभावित इलाके में सड़क होने पर कई बार टेंडर ही नहीं डाला जाता। कई मामलों में टेंडरर ने क्वालिफाइ नहीं किया। कभी सिंगल टेंडर पड़ा, तो कभी प्री- क्वालिफाइ करने वाली कंपनियों ने टेंडर नहीं डाले। एसबीडी के कारण अधिकांश टेंडर नेशनल कंपीटेटिव बीडिंग होते हैं। झारखंड की बैंक गारंटी शर्तो में शामिल है। इस कारण भी कई मामले लटक जाते हैं। इन सबसे ऊपर का खेल है सेटिंग-गेटिंग का।ड्ढr तमाम निर्देश और सख्ती के बाद भी इंजीनियर टेंडर में खेल करने से बाज नहीं आते। इससे भी मामला लटकता है। बीओक्यू बेचे जाने से बीड की समीक्षा किये जाने तक इंजीनियर पेंच लगाते हैं। कई टेंडरर को फेवर करने के कारण भी कभी-कभी मामला लटक जाता है। राजनीतिक पैरवी-पहुंच भी टेंडर को प्रभावित करता है। नतीजा टेंडर लटकते हैं और योजना महीनों घिसटती हैं।ड्ढr ं

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