फोटो गैलरी

अगली खबर पढ़ने के लिए यहाँ टैप करें

हिंदी न्यूज़नरेंद्र मोदी: संघ प्रचारक से प्रधानमंत्री तक का सफर

नरेंद्र मोदी: संघ प्रचारक से प्रधानमंत्री तक का सफर

किशोरावस्था में ही आरएसएस के संपर्क में आए नरेंद्र मोदी 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद पूर्णकालिक प्रचारक बन गए। इस दौरान मोदी को उनके राजनीतिक गुरु लक्ष्मणराव इनामदार या वकील साहब का...

नरेंद्र मोदी: संघ प्रचारक से प्रधानमंत्री तक का सफर
लाइव हिन्दुस्तान टीमFri, 16 May 2014 04:40 PM

किशोरावस्था में ही आरएसएस के संपर्क में आए नरेंद्र मोदी 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद पूर्णकालिक प्रचारक बन गए। इस दौरान मोदी को उनके राजनीतिक गुरु लक्ष्मणराव इनामदार या वकील साहब का दिशानिर्देशन मिला।

तर्कशक्ति, तीक्ष्ण बौद्धिक क्षमता और सांगठनिक कौशल के धनी मोदी ने आरएसएस में गहरी पैठ बनाई। आपातकाल के दौरान (1975-77) छद्म वेश धारण कर मोदी सरकार की पकड़ से दूर रहे। उन्होंने प्रतिबंधित साहित्य बांटने और जार्ज फर्नांडिस जैसे नेताओं को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने का काम किया।

नीलांजन मुखोपाध्याय ने अपनी किताब एनाटॉमी ऑफ नरेंद्र मोदी-द मैन एंड हिज पॉलीटिक्स में लिखा है कि शुरुआती दौर में संघ में भी उन्हें वरिष्ठों के लिए चाय-नाश्ता बनाने की जिम्मेदारी दी गई। लेकिन मेहनत उन्हें हर मनचाहे मुकाम पर ले गई। वह संघ के उन दो पहले प्रचारकों में थे जो बाद में पूरी तरह से भाजपा के लिए कार्य करने लगे।

मोदी आरएसएस के जरिये ही1985 में भाजपा में शामिल हुए। तब शंकर सिंह वाघेला और केशूभाई पटेल गुजरात भाजपा के कद्दावर नेताओं में से थे। अहमदाबाद नगर निकाय चुनाव (1986) में पार्टी की जीत में उनका अहम योगदान रहा। आडवाणी की रथ यात्रा राष्ट्रीय स्तर पर उनकी पहली बड़ी राजनीतिक जिम्मेदारी थी।

1988 में वह गुजरात भाजपा इकाई में संगठन सचिव चुने गए। लेकिन वर्ष 1991 में मुरली मनोहर जोशी की कन्याकुमारी से श्रीनगर तक की एकता यात्रा के सफल संयोजन से मोदी का कद और बढ़ा। भाजपा की 1995 में गुजरात विधानसभा चुनाव में जीत के पीछे मोदी की चुनावी रणनीति की अहम भूमिका रही।

उनकी प्रतिभा को देखते हुए नवंबर 1995 में उन्हें भाजपा का राष्ट्रीय सचिव बनाकर दिल्ली भेजा गया। जहां उन्हें हरियाणा और हिमाचल की जिम्मेदारी दी गई। मोदी को मई 1998 में भाजपा का महासचिव बनाया गया। गुटबाजी खत्म करने के लिए 1998 के गुजरात चुनाव में प्रत्याशियों के चयन में मोदी ने शंकर सिंह वाघेला की बजाय केशूभाई के समर्थकों को तवज्जो दी और इस रणनीति से पार्टी को कामयाबी मिली।

2001 निर्णायक साबित हुआ
मुख्यमंत्री केशूभाई पटेल की सेहत 2001 में बिगड़ने लगी और विधानसभा उपचुनाव में पार्टी बुरी तरह हारी। सत्ता के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच भुज में आए भूकंप से निपटने में नाकामी ने केशूभाई की सियासी जमीन ही हिला दी। लालकृष्ण आडवाणी केशूभाई को नाराज कर सरकार चलाने में अनुभवहीन मोदी को मुख्यमंत्री बनाए जाने के पक्ष में नहीं थे। मगर मोदी ने उप मुख्यमंत्री बनने से इन्कार करते हुए अटल और आडवाणी को बता दिया कि उन्हें पूरी जिम्मेदारी दी जाए या अलग ही रखा जाए। लिहाजा सात अक्टूबर 2001 को उन्हें राज्य का मुख्यमंत्री बनाया गया ताकि दिसंबर 2002 के चुनाव में सत्ता बचाई जा सके।

पहला कार्यकाल (2001-02)
इसी दौरान 27 फरवरी 2002 को सैकड़ों श्रद्धालुओं समेत रेलयात्रियों को लेकर आ रही साबरमती एक्सप्रेस की कुछ बोगियों में गोधरा के निकट आग लगा दी गई। इसमें करीब 60 लोग मारे गए। इससे गुजरात में दंगे भड़क गए जिसमें करीब दो हजार लोग मारे गए। मोदी की भूमिका पर भी सवाल उठे। हालांकि अप्रैल 2009 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एसआईटी ने दिसंबर 2010 में सौंपी अपनी रिपोर्ट में कहा कि सांप्रदायिक हिंसा को जानबूझकर न रोकने के आरोपों में उन्हें मोदी के खिलाफ कोई सुबूत नहीं मिला। उन्हें क्लीनचिट देने की रिपोर्ट अहमदाबाद कोर्ट ने 26 दिसंबर 2013 को स्वीकार की।

दूसरा कार्यकाल (2002 के विधानसभा चुनाव)

अप्रैल 2002 में गोवा में हुई भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में उन्होंने इस्तीफा दे भी दिया था, लेकिन इसे स्वीकार नहीं किया गया। मोदी ने 19 जुलाई को इस्तीफा देने के साथ विधानसभा भंग करने की सिफारिश कर दी। चुनाव में 182 में 127 सीटें जीत मोदी सत्ता में आ गए। 2002 से 2007 के कार्यकाल में उन्हें राज्य में निवेश लाने के अभूतपूर्व प्रयास किए और गुजरात मॉडल सामने लाए।

तीसरा कार्यकाल (2007-2012)
गुजरात के सबसे लंबे वक्त तक मुख्यमंत्री का रिकॉर्ड बना चुके मोदी को 2007 के विधानसभा चुनाव में 182 में से 122 सीटें मिलीं। 2011-12 के दौरान मोदी ने 26 जिलों की 36 जगहों पर सद्भावना उपवास कर मुस्लिम समुदाय को अपनी ओर आकर्षित करने का प्रयास किया। एक सर्वे में100 शीर्ष उद्योगपतियों  में 74 ने मोदी को पसंद बताया था।अक्टूबर 2008 टाटा मोटर्स का गुजरात में नैनो प्लांट लगाना भी सुर्खियों में रहा।?

चौथा कार्यकाल (2012 से अब तक)
2012 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने गुजरात में लगातार तीसरी बार मोदी के नेतृत्व में जीत हासिल की। पार्टी को 115 सीटें मिलीं। चौथे कार्यकाल के प्रारंभ से ही उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक स्वीकार्यता बढ़ाने के लिए गंभीर प्रयास किए।

बचपन कठिनाइयों में बीता
आठ साल की उम्र में गुजरात के छोटे से वडनगर स्टेशन पर पिता की चाय की दुकान में हाथ बंटाने वाले नरेंद्र दामोदर भाई मोदी का बचपन कठिनाइयों और अभावों के बीच बीता। बड़े भाई के साथ बस टर्मिनल पर भी उन्हें चाय बेचने का काम किया। मोदी युवाकाल में थिएटर के दौरान गुजराती लोककथा के किरदार जोगीदास खुमान की भूमिका निभाते थे, जो रॉबिन हुड से मिलता-जुलता था।
किशोरावस्था के दौरान वह बाल शाखाओं में गए जरूर लेकिन उन्हें आरएसएस के उद्देश्यों और सिद्धांतों से अनजान थे। यह उनके लिए महज एक खेलकूद का जरिया था। मगर संघ के अनुशासन ने उन पर गहरा असर डाला। 12 साल की उम्र में मोदी चीन युद्ध में हिस्सा लेने जा रहे सैनिकों से मिलने के लिए कई बार मेहसाणा गए। तीन साल बाद ही पाकिस्तान के साथ 1965 के युद्ध की विभीषिका का असर भी उन्होंने महसूस किया।

वैवाहिक जीवन
17 साल की उम्र में जसोदाबेन से शादी के बाद उनके अंतर्मन में चल रहा वैचारिक द्वंद बेचैनी में बदल गया। राष्ट्र निर्माण या देश सेवा के सही रास्ते की तलाश की इसी उधेड़बुन में ही मोदी ने घर छोड़ दिया। संन्यासी बनने का लक्ष्य लेकर वह बेलूर के रामकृष्ण मठ पहुंचे। लेकिन स्नातक न होने की वजह से उन्हें यहां प्रवेश न मिल सका। देश की कई जगहों का चक्कर लगाने के बाद मोदी गुजरात लौट आए। हालांकि गृहस्थ जीवन अपनाने को वह तब भी राजी नहीं हुए।

नरेंद्र दामोदरदास मोदी
जन्म: 17 सितंबर 1950 को मेहसाणा के वडनगर में
पिछड़ी घांची जाति से ताल्लुक
छह भाई-बहनों में तीसरे स्थान पर
दामोदारदास मूलचंद मोदी(पिता), हीराबेन(मां)
वडनगर से स्कूली शिक्षा, औसत छात्र
17 साल की उम्र में जसोदाबेन से शादी
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से भी जुड़े रहे
दिल्ली विवि से राजनीति विज्ञान में स्नातक, गुजरात विवि से परास्नातक
ट्रेंडी राजनेताओं में मोदी
डिजिटल डायरी रखने वाले पहले नेताओं में से एक
ड्रेसिंग सेंस गजब का, मोदी कुर्ता आज बेहद मशहूर
डिजायनर फाउंटेन पेन मोंट ब्लांक बेहद पसंदीदा
फोटोग्राफी का शौक, बालों को लेकर भी संजीदा
वेबसाइट, फेसबुक, ट्विटर पर रहते हैं सक्रिय
दूसरों को सुनने का गजब का धैर्य
सुबह एक-डेढ़ घंटे तक इंटरनेट सर्फिंग
दिन में चार या पांच बार कपड़े बदलना
ज्यादातर अकेले ही भोजन करना पसंद


कैसे पूरे चुनाव को अपने इर्दगिर्द केंद्रित किया

खुद को गुजरात के विकास पुरुष की तरह पेश किया
गुजरात जैसे विकास का वादा कर बढ़ाई लोकप्रियता
अमेरिका की राष्ट्रपति प्रणाली जैसा चुनाव लड़ा
दिल्ली में कमजोर नेतृत्व के मुद्दे को जमकर उभारा
भाजपा की प्रचार सामग्री में मोदी ही पूरी तरह छाए रहे
पूरा चुनाव मोदी लाओ-मोदी रोको के मुद्दे पर सिमटा रहा
हाईटेक मशीनरी के जरिये विरोधियों को समय पर दिया जवाब
विरोधियों के हमलों को मनमुताबिक मोड़कर बटोरी सहानुभूति
अखबारों, चैनलों से लेकर सोशल मीडिया में मोदी केंद्रित प्रचार
मोदी के लाखों वालंटियर्स मीडिया के हर मंच पर आRामक दिखे
सुनियोजित तरीके से वोटिंग के दिन वडोदरा, बनारस में नामांकन
वोटिंग के दिन सेल्फी, वीडियो संदेश के विवादों से भी पाया प्रचार
रोटी, लड्डू से लेकर हर रोजमर्रा की सामग्री में मोदी की छाप दिखी

मैराथन चुनाव प्रचार
तीन लाख किमी का सफर
437 रैलियां 25 राज्यों में
5827 सार्वजनिक कार्यRम
1350 थ्री डी रैलियां
04 हजार जगहों पर चाय पे चर्चा
प्रचार की रणनीति कैसी थी

हर रैली में स्थानीय मुद्दों को जरूर उठाया
तुकबंदियों के जरिये दिलोदिमाग पर छाए
बब्बर शेर, 56 इंच के सीने जैसे जुमलों से भाषणों में नीरसता नहीं आने दी
पार्टी नेताओं के विवादित बयानों से दूर ही रहे
विरोधी नेताओं पर सीधे हमले से नहीं किया परहेज
एके-49 जैसे हमलों से विरोधियों को करारा जवाब
रैली के लिए पांच रुपये चंदा लेने जैसे अनूठे प्रयोग
उबाऊ और जटिल मुद्दों से परहेज, देसी शैली में प्रचार
ट्रेड, टूरिज्म, टेक्नोलॉजी, टैलेंट, ट्रेडीशन का 5टी


क्या करते रहे वादे
हर रैली में युवाओं को रोजगार का वादा
बिजली, सड़क जैसे बुनियादी ढांचे का विकास
नदी जाेड़ो परियोजना, गंगा सफाई का संकल्प
मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस का वादा
भ्रष्टाचार में अपनों को भी न बख्शने की प्रतिज्ञा
बुलेट ट्रेन, ट्विन सिटी को जोड़ने जैसे वादे
काला धन वापस लाने का संकल्प

क्या है स्थिति
32 फीसदी स्नातक बेरोजगार अभी
0.1 फीसदी औद्योगिक विकास दर(2012-13)
गंगा सफाई में 20 हजार करोड़ का खर्च बेकार
घोटालों, अनिर्णय से जूझ रही सरकार
येदियुरप्पा, श्रीरामुलू जैसे नेता चुनौती
भारी तंगी से जूझ रहा रेलवे
विदेशी बैंकों से नहीं मिला पर्याप्त सहयोग

कैसे पूरे होंगे वादे
स्किल डेवलपमेंट पर खासा जोर रहेगा
निजी निवेश को बढ़ावा,परियोजना को त्वरित मंजूरी
अलग नदी मंत्रालय और फंड आवंटित कर
पारदर्शिता और सब तक तकनीकी पहुंच, सिंगल विंडो सिस्टम
भ्रष्ट नेताओं के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन
रेलवे के निजीकरण या पीपीपी मॉडल पर निवेश
कर सूचना आदान-प्रदान पर कठोर रुख अपनाएं

पांच बड़ी चुनौतियां

महंगाई, भ्रष्टाचार खत्म कर अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना
राष्ट्रीय हितों को प्रमुखता देते हुए विदेश नीति को प्रमुखता
अल्पसंख्यकों के मन में विश्वास पैदा कर मुख्य धारा से जाेड़ना
हर राज्य में उसकी जरूरतों को देखते हुए विकास मॉडल
पूर्वी राज्य बिहार, बंगाल, ओडिशा जसे पिछड़े राज्यों मे विकास

epaper