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मचाबूत पंचायतें चाहता है राचय वित्त आयोग

राय वित्त आयोग प्रदेश के नगर निकायों और पंचायतों को मजबूत और स्वावलम्बी बनाने के लिए उसकी स्वायत्तता पर जोर देगा। आयोग ने महत्वपूर्ण संस्तुतियाँ लगभग तैयार कर ली हैं और वह अपनी रिपोर्ट सम्भवत: जून के मध्य में राय सरकार को सौंप देगा। आयोग का कार्यकाल 30 जून को समाप्त हो रहा है।ड्ढr निकायों और पंचायतों को अब दो-तीन फीसदी यादा धन मिलेगा। राय अपने हिस्से के कर-राास्व में से उसे यह हिस्सा देते हैं। इसके अलावा करतर राजस्व से भी निकायों और पंचायतों को धनराशि दिलवाए जाने की संस्तुति करगा। भारतीय संविधान के तहत इन निकायों को जितने अधिकार मिलने चाहिए थे, वे अब तक नहीं मिल पाए हैं। इनके द्वारा जिन योजनाओं का संचालन होना है,वह राय सरकार तय करती है और उसकी हरी झण्डी के बिना ये काम नहीं कर सकतीं। जबकि संविधान के 73वें और 74 संशोधन में साफ लिखा है कि ये निकाय आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय की योजनाएँ खुद बनाकर उनका संचालन करंगे। एस.ए.टी. रिजवी की अध्यक्षता वाले तृतीय राय वित्त आयोग भू-राजस्व, खदान या मनोरंजन कर जैसे करतर राजस्व के मद में मिलने वाली पचास फीसदी राशि स्थानीय स्तर पर स्थानीय निकाय को दिए जाने की संस्तुति पर भी विचार कर रहा है। खदान में मौरंग, बालू, मिट्टी और गिट्टी की रायल्टी की आधी राशि जब निकायों को सीधे मिलने लगेगी तब वह क्षेत्र के विकास पर अधिक ध्यान दे सकेंगी और उनको राय सरकार की ओर मुँह नहीं ताकना होगा। आयोग विभिन्न निकायों को अलग से किसी योजना के लिए अनुदान राशि दिए जाने पर भी विचार कर रहा है।

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  • Web Title: मचाबूत पंचायतें चाहता है राचय वित्त आयोग