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अधूरा रह गया कलाम का सपना

गांवों को शहरों की तर्ज पर विकसित करने का पूर्व राष्ट्रपति एपीजे कलाम का सपना, प्रोवाइडिंग अरबन एमिनिटी इन रूरल एरिया (पूरा) सपना ही रह गया। छत्तीसगढ़ सरकार ने कलाम के सपने को धरातल पर उतारने के लिए रायपुर के पास डेढ़ साल पहले उन्हीं के हाथों धूमधाम से योजना का शिलान्यास कराया था। मगर उनके राष्ट्रपति पद से हटने के बाद यह योजना ठंडे बस्ते में चली गई। रायपुर के कलेक्टर सोनमणि बोरा का कहना है, ‘पूरा’ का कितना प्रोग्रेस हुआ है, इसे मैं पता करके बताऊंगा। तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे कलाम ने 7 नवंबर 06 को इसका शिलान्यास किया था। सरकार ने वर्ष 2011 तक योजना को पूर्ण करने का लक्ष्य रखा था। शिलान्यास के कुछ दिनों तक तो योजना पर जोर-शोर से काम हुआ। मगर इसके बाद पूरा प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में चली गई। योजना आयोग ने जब ‘पूरा’ के लिए धन देने से इंकार किया था तो राय सरकार ने कहा था कि कलाम के सपने को पूरा करने के लिए धन की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी। गौरतलब है, ‘पूरा’ योजना के लिए रायपुर से लगे 22 गांवों का चयन किया गया था। सुविधाआें के नाम पर इन गांवों को रायपुर से सिर्फ बस चलाई जा रही है। पूरा गांवों में मूलभूत सुविधाआें के लिए 5.7 करोड़ की कार्ययोजना बनाई गई थी। लेकिन राय शासन ने बजट में मात्र एक करोड़ रुपए का प्रावधान किया। ‘पूरा’ में स्कूल खोलने के लिए डीएवी और अस्पताल के लिए अपोलो ग्रुप ने भी राय सरकार के पास पेशकश की थी। मगर सरकार के ठंडे रुख को देखकर पीछे हट गए। क्या होगा ‘पूरा’ में : योजना के अनुसार ‘पूरा’ गांव, सुविधाआें के मामले में शहरों से पीछे नहीं रहेगा। सड़कें चौड़ी होंगी। पब्लिक स्कूल और अपोलो जैसे सर्वसुविधायुक्त अस्पताल रहेगा। गांव में एक भी कच्चे मकान नहीं होंगे। सभी घरों में शौचालय होंगे। 50 फीसदी से अधिक बेरोजगारों को काम देने के लिए प्रशिक्षण संस्थाआें और डेयरी जैसे कई उद्योग खोल जाएंगे। गांवों में मोबाइल सुविधा होगी।

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