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यह राह नहीं बचपन की

यह राह नहीं बचपन कीड्ढr ‘हिन्दुस्तान’ में ‘खेल के दौरान कहासुनी में बैट मारकर हत्या’ समाचार पढ़ा, जिसने मन को झकझोर कर रख दिया। कुछ समय पूर्व गुड़गांव (हरियाणा) व सतना (म.प्र.) की बालअपराध की घटनाओं ने देश को हिला दिया था। टीवी ने भी अपराधों को बढ़ावा दिया है। कभी समाज का आईना रही फिल्में आज हिंसा, अश्लीलता व अपराधों का आईना बनती जा रही हैं। किसी क्रिया को सीधे होते देखने के अधिक स्थायी प्रभाव को विज्ञान भी स्वीकारता है। परिणाम से अनभिज्ञ मासूम भी इसी के वशीभूत होकर ‘रील लाइफ’ को ‘रीयल लाइफ’ में कर डालते हैं।ड्ढr पवन कुमार आचार्य, नई दिल्ली चिराग कहां, रोशनी कहांड्ढr ‘जो फल चखा नहीं, वही मीठा है’। यही सूरत-ए-हाल हमारे माननीय वित्तमंत्री साहब की घोषणाओं का है। उनके अनुसार बैंकों को कार्य परम्परागत धंधों में कार्यरत कारीगर जसे सुनार, लुहार, नाई, धोबी, शू-मेकर, आदि को कर्ज उपलब्ध कराना चाहिए। आज प्रधानमंत्री रोजगार योजना में बेरोजगार कम, आर्थिक रूप से सम्पन्न व्यक्ित अधिक ऋण प्राप्त कर रहे हैं। जरूरतमंद तो बैंकों, ब्लॉक डेवलपमेंट आफिसों के फार्मो को देख कर ही हौसला खो देता है। 81 प्रतिशत बचत खाता धारकों में अधिकतर बचत खातों का व्यवसायीकरण हो चुका है। बचत खाता केवल पेंशनधारकों के लिए, बिजली-पानी, टेलीफोन, स्कूल फीस, बीमा, आयकर आदि के चैकों के लेन-देन के लिए खोले जाते हैं। परंतु आज बचत खातों से व्यापारिक लेनदेन होने लगे हैं।ड्ढr राजेन्द्र कुमार सिंह, रोहिणी, दिल्ली बेवफाई पे-कमीशन कीड्ढr छठे वेतन आयोग द्वारा लोकलुभावन सिफारिशों की रिपोर्ट ने मूल वेतन अथवा पेंशन पर 40 प्रतिशत वृद्धि का प्रावधान तो कर दिया और वाहवाही भी लूट ली, परन्तु महंगाई भत्ते का 50 प्रतिशत हिस्सा जिस पर वर्तमान में यानी 1-4-2008 से अब तक संयुक्त रूप से निरंतर महंगाई भत्ता मिल रहा है, उसे 40 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी की परिधि से अलग कर दिया गया। 40 प्रतिशत वृद्धि का लाभ घट कर मात्र 28 प्रतिशत रह गया। वही बात हुई - हाथी के दांत खाने के और, दिखाने के और।ड्ढr आर. एल. पाठक, लोधी कॉलोनी पाप-पुण्य में कौन उलझे?ड्ढr हमारे पुरखे पाप करते हुए डरते थे, क्योंकि वे पाप को समझते थे, किन्तु हम आज आधुनिक युग में रहते हुए पाप-पुण्य को नहीं मानते। हमने उस युग के नीति शास्त्र को त्रुटिपूर्ण और अव्यावहारिक समझकर एक पृथक नीतिशास्त्र का निर्माण कर लिया है जिसमें बुद्धि का प्राधान्य है। हमें हरभजन व श्रीसंत के चांटे की आवाज, चीयर्स लीडर्स के नाम पर झूमती युवतियों की पुकारें सुनाई देती हैं. पर सामाजिक चेतना को बरामदे के पीछे की आत्मा की कोठरी है, जिसमें किसी को नहीं ले जाते।ड्ढr विजय कुमार सिंह ‘भूपेन्द्र’, नई दिल्ली मैत्री की स्वर्ण जयंतीड्ढr राजशाही से लोकतांत्रिक व्यवस्था स्वेच्छा से स्वीकार कर भूटान नरेश ने सहृदयता का परिचय दिया है। नए लोकतांत्रिक भूटान की संसद को सम्बोधित करने वाले भारतीय प्रधानमंत्री प्रथम विदेशी बने, यह गौरव की बात है। स्वर्ण जयंती रेल से सांस्कृतिक घनिष्ठता बढ़ेगी। भूटान के विकास में भारत का योगदान रहा है। भारत पड़ोसियों के साथ सदैव सहयोगी रहा है।ड्ढr युधिष्ठिर लाल कक्कड़, गुड़गांवं

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