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हर चुनाव में मीठा पानी होता है चुनावी मुद्दा

राजस्थान में बाड़मेर जैसलमेर संसदीय क्षेत्र में आजादी के 60 साल बीतने के बावजूद प्रत्याशी आज भी मीठा पानी उपलब्ध कराने के नाम पर जनता से वोट मांग रहे है। थार मरूस्थल के इस क्षेत्र में पेयजल की विकराल समस्या बनी हुई है और हर चुनाव में यही मुख्य मुद्दा बना रहता है। आम जनता और मतदाता प्रत्याशियों के समक्ष एक ही समस्या उठाते है कि उनके इलाके में पानी कब आएगा और मीठे पानी से उनके हलक तर होंगे। भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार और सांसद मेजर मानवेन्द्र सिंह तथा कांग्रेस प्रत्याशी हरीश चौधरी गांव गांव ढ़ाणी ढ़ाणी में लोगों से रूबरू हो रहे हैं और हर जगह उन्हें पानी की समस्या से जूझना पड़ रहा है। पंचायत से लेकर लोकसभा तक का चुनाव पानी उपलब्ध कराने के नाम पर लड़ा जाता है। पूर्व सांसद वृद्धिचंद जैन ने लोकसभा में प्रभावी ढ़ंग से पेयजल का मुद्दा उठाया था, लेकिन समस्या का स्थाई समाधान नहीं हो पाया। इंदिरा गांधी नहर परियोजना गडरारोड तक लाने की योजना भी बनी। नर्मदा का पानी लाने के भी प्रयास हुए। लेकिन पेयजल समस्या का स्थाई समाधान अभी तक नहीं हो पाया है। पहली बार निर्वाचित भाजपा के सांसद मानवेन्द्र सिंह ने पेयजल की तीन बड़ी परियोजनाआें मोहनगढ़-बाड़मेर लिफ्ट कैनाल योजना, फलसूंड पोकरण कल्याणपुर पेयजल योजना तथा धवा चागुण्डी पेयजल योजनाआें के लिए वित्तीय स्वीकृति के साथ बजट भी उपलब्ध करवाया। तीनों योजनाआें पर त्वरित गति से कार्य आरंभ हुआ, लेकिन सारे परिवर्तन के साथ ही इन परियोजनाआें पर ग्रहण सा लग गया है।

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