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मिड डे मील के लिए देसी पौष्टिक पेय

मिड डे मील में क्या खिलाया जाए, यह डिबेट अभी खत्म नहीं हुई है। इस बीच भारत सरकार के केन्द्रीय आयुव्रेद एवं सिद्धा अनुसंधान परिषद ने कड़े पाठ्यक्रम व बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बोझ से दबे स्कूली बच्चों के लिए नया पौष्टिक ड्रिंक विकसित किया है।ड्ढr अगर यह ड्रिंक सचमुच कामयाब हुआ तो सरकार की प्रतिष्ठित मिड डे मील योजना बच्चों के भोजन के अधिकार से आगे जाकर उनके मानसिक पोषण के अधिकार को पूरा कर रही होगी। सब जानते हैं कि भारी भरकम स्कूली कोर्स बच्चों में मानसिक तनाव पैदा कर देते हैं। केन्द्रीय आयुव्रेद एवं सिद्धा अनुसंधान परिषद के निदेशक डा.लवेकर के अनुसार यह ड्रिंक आयुव्रेद के अर्वाचीन ज्ञान पर आधारित है। दही के पानी, दुग्ध, शर्करा और कुछ सिद्ध वनस्पतियों के अर्क से यह ड्रिंक बनाया गया है। इस पेय से मस्तिष्क को ताकत मिलेगी और उनकी सोचने व समझने की शक्ित भी बढ़ेगी। ड्रिंक में भारी मात्रा में कैलोरी भी हैं। उक्त ड्रिंक अमूल इंडिया दूध उत्पादक डेयरी के सहयोग से तैयार किया गया है। वही इसका उत्पादन करेगा। ड्रिंक के स्वाद, गंध आदि के बारे में सभी सरकारी अधिकारियों से स्वीकृति मांगी जा चुकी है।हालांकि इस संवाददाता को यह इतना स्वादिष्ट नहीं लगा। बहरहाल, ड्रिंक को दिल्ली के एम्स और बेंगलूरू के नेशनल इंस्टीट्यूट आफ मेंटल हैल्थ एन्ड न्यूरो साइंसेज में क्िलनिकल ट्रायल के लिए भेजा जा रहा है। यहां इसका बच्चों पर प्रभाव देखा जाएगा। संबंधित वैज्ञानिक ट्रायल के लिए प्रोटोकोल बना रहे हैं। ट्रायल पूरा हो जाने के बाद ड्रिंक को मिड डे मील कार्यक्रम में उतारने के लिए हरी झंडी दे दी जाएगी। इस ड्रिंक की मूल सामग्री सूखे पाउडर के रूप में है। इसे गुनगुने पानी में घोल कर चटपट पेय तैयार किया जा सकता है। सूखे पाउडर के रूप में इसे बनाने का उद्देश्य यह है कि दूर दराज के ग्रामीण इलाकों में लाने व ले जाने में आसानी रहे। प्रयोग की मियाद उत्पादन से छह माह तक होगी।

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