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‘कैंसर’ नहीं ‘कर्करोग’ कहें जनाब

‘कर्करोग’ नाम है उस बीमारी का जिसे ‘अंग्रेजी’ में ‘कैंसर’ कहते हैं और शायद ‘हिन्दी’ में भी। अब इसी नए नाम के साथ सिगरेट कंपनियां लोगों के बीच जागरूकता अभियान चला रही हैं। कैंसर की जगह ‘कर्करोग’ शब्द का इस्तेमाल नया ‘फंडा’ है, लोगों को भ्रम में डालने का। क्योंकि आम लोगों की कौन कहे, राजधानी में कैंसर की बीमारी का इलाज कर रहे कई बड़े डाक्टरों को भी इस नाम की जानकारी नहीं है।ड्ढr ड्ढr ‘मार्केटिंग’ गुरुओं ने सिगरट कंपनियों द्वारा अपने प्रोडक्ट के इस्तेमाल के खिलाफ चलाए जा रहे प्रचार में इसी शब्द के इस्तेमाल की सलाह दी है। सिगरट की डिब्बी और प्रचार सामग्रियों पर छापने वाले वैधानिक चेतावनी में अब कुछ कंपनियों ने ‘तंबाकू से कर्करोग होता है’ लिखना शुरू कर दिया है। हालांकि तकनीकी रूप से इस शब्द का इस्तेमाल गलत नहीं है।ड्ढr ड्ढr राज्य के स्वास्थ्य मंत्री नंद किशोर यादव ने इसे लोगों को ‘मिसगाइड’ करने वाली कार्रवाई बताते हुए इसपर रोक लगाने की बात कही। उन्होंने कहा कि शब्दों को घुमाकर लिखना और उसके जरएि लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलावड़ बहुत ही गलत बात है। इस प्रवृति पर रोक लगनी चाहिए। आईएमए के पूर्व अध्यक्ष डा. अजय कुमार ने इसे एकदम अनुचित बताते हुए कहा ऐसा हरगिज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह आम बोलचाल की भाषा नहीं है। डा. कुमार ने कहा कि इसके साथ अंग्रेजी की इस्तेमाल तो किया ही जाना चाहिए क्योंकि सिगरट सिर्फ हिन्दीभाषी लोग ही नहीं पीते। क्षेत्रीय यूनानी रिसर्च इंस्टीच्यूट के उप निदेशक डा. लताफत अली खान का कहना है कि यूनानी में कैंसर को सरतान के नाम से जाना जाता है। लेकिन इस टर्मिनोलॉजी का इस्तेमाल आम लोग नहीं करते। तंबाकू के इस्तेमाल के खिलाफ अभियान चला रहे महावीर कैंसर संस्थान के निदेशक डा. जे के सिंह ने इसे जनता के धोखा करार देते हुए इसपर तुरंत रोक लगाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि डाक्टर भी इस शब्द का इस्तेमाल नहीं करते।

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