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किसानों की समस्याएं रोचा सुनें

मैली धोती वालों को दफ्तर में घुसने से रोकने वाले अधिकारियों की अब खर नहीं। अब कृषि विभाग के हर अधिकारी को रविवार और अवकाश के दिन को छोड़कर रो एक घंटे किसानों से मिलकर उनकी समस्याओं को सुनना होगा। सरकार ने इस आशय का निर्देश जारी कर दिया है। इसमें फांकेबाजी भी नहीं चलेगी। अधिकारी को हर माह के अंत में रिपोर्ट भी देनी होगी कि कितने किसानों की समस्याओं का निराकरण उनके स्तर पर किया गया। कृषि विभाग के सचिव सी के अनिल द्वारा जारी निर्देश के अनुसार रो तीन से चार बजे अपराह्न् का समय किसानों के लिए होगा।ड्ढr ड्ढr इस समय हर अधिकारी अपने कार्यलय में उपस्थित होंगे और किसानों की समस्याएं सुनेंगे। कृषि विभाग के प्रखंड से लेकर प्रमंडल स्तर के अधिकारियों पर यह निर्देश लागू होगा। इन कार्यालयों के सूचना पट्ट पर भी यह आदेश लगाया जायेगा ताकि किसान इससे अवगत हो सकें। कार्यालयों में एक रािस्टर भी रहेगा जिसपर आगंतुक किसान अपनी समस्या दर्ज कर हस्ताक्ष्र करंगे। किसान से बात कर उनकी समस्या के निदान के लिए किये गये प्रयास को भी अधिकारी उस रािस्टर पर अंकित करंगे। माह के अंत में रािस्टर का पूरा विवरण कार्यालय द्वारा वरीय अधिकारी को भेजा जायेगा। इस प्रकार सारी सूचनाएं कृषि विभाग के राज्य कार्यालय में जमा होंगी जिसकी समीक्षा राज्य मुख्यालय में बैठे अधिकारी करंगे।ड्ढr ड्ढr सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से सरकार को यह जानकारी प्राप्त हो सकेगी कि राज्य के किस कोने में किस नेचर की अधिक समस्याएं हैं। इसके बाद सरकार अपने स्तर पर यह प्रयास करगी कि बड़ी समस्याओं का निराकरण एकबार किया जा सके।

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