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किसानों के मिसाल बने जयप्रकाश

ैमूर के दुर्गावती में एक ऐसे किसान हैं, जो एक साथ कई कारोबार कर कृषकों के बीच मिसाल बन गए हैं। इनके इसी गुर के कायल सरकार ने उन्हें ‘किसान श्री’ पुरस्कार से नवाजा है। कृपालपुर गांव के किसान जय प्रकाश सिंह ने बकरी, गाय, भैस,मछली, मुर्गा पालन तो करते ही हैं, औषधीय पौधे, अनाज, सब्जी की खेती और बागवानी भी करते हैं। इन कारोबारों से उन्हें प्रति वर्ष लाखों रूपए की आमदनी होती है। इसी की बदौलत वे परिवार के सदस्यों को उच्च शिक्षा दिला रहे हैं।ड्ढr ड्ढr डेयरी से निकले सैकड़ों किलो दूध की बिक्री के लिए उन्हें बाजारों में नहीं जाना पड़ता, बल्कि उनके दरवाजे से ही दूध की बिक्री हो जाती है। इनके एक एकड़ के निजी तालाब में रहू, कतला, भाकुर, लेमन ग्रास इत्यादि प्रजाति की मछलियां हैं। दलहन, तेलहन खरीफ व रबी फसलों के अलावा इस वर्ष से जय प्रकाश ने ढाई एकड़ भूमि में औषधीय पौधा मेंथा की भी खेती शुरू की है, जिसका तेल सात सौ से एक हाार रूपए प्रति किलो यूपी के बाराबांकी के बाजारों में बिकता है। उन्होंने बताया कि गेहूं,धान व दलहन की भूसी तथा सरसों व तीसी से निकली खल्ली मवेशियों को खिलाने के काम में आ जाता है।ड्ढr ड्ढr मुर्गे का अपशिष्ट मछलियों के लिए चारा का काम करता है तो स्वयं द्वारा तैयार वर्मी कम्पोस्ट का उपयोग कृषि कार्य में किया जाता है। मतलब उनके द्वारा अपशिष्टों का सदुपयोग कर लेने से बाजार से बहुत कुछ नहीं खरीदना पड़ता है।

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