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प्रवासी कामगारों के लिए कोष बनाएगा भारत

भारत शीघ्र ही प्रवासी कामगारों की आपात स्थितियों और आर्थिक कठिनाइयों में सहायता करने के लिए एक कोष की स्थापना करेगा।प्रवासी मामलों के मंत्रालय के सचिव के. मोहनदास ने बताया कि कोष की स्थापना के लिए उपायों पर विचार किया जा रहा है। मंत्रालय के सामने एक विकल्प कामगारों से एमिग्रेशन क्िलयरेंस रिक्वायर्ड (इसीआर) पासपोर्ट पर स्वीकृति देते समय लिए जाने वाले शुल्क की राशि को 200 रुपये से बढ़ाकर 1,000 रुपये करना है। गौरतलब है कि भारत से 2006 में 6 लाख 77 हजार और 2007 में 8 लाख हजार प्रवासी कामगार बाहर गए। इनसे एकत्र शुल्क से कोष का निर्माण काफी आसानी से किया जा सकता है। भारत से जिन 17 देशों के लिए प्रवास स्वीकृति आवश्यक है उनमें 12 मध्य एशिया में स्थित हैं। यहां से भारत में प्रवासियों द्वारा भेजे जाने वाले 27 अरब डालर का करीब आधा भाग आता है। मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि वह पहले ईसीआर देशों के कामगारों को इस योजना का लाभ देना चाहते हैं। इसके बाद उन देशों के कामगारों को भी इसका लाभ दिया जाएगा जहां के लिए एमिग्रेशन क्िलयरेंस की आवश्यकता नहीं है। इस योजना में स्वास्थ्य सहायता के लिए 60 हजार रुपये, कानूनी सहायता के लिए 25 हजार और मृत्यु पर 10 लाख रुपये की राशि दी जाएगी। प्रवासी कामगारों के लिए ‘प्रवासी भारतीय बीमा योजना’ का सुझाव श्रम मंत्रालय ने 2001 में दिया था , लेकिन संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार ने प्रवासी मामलों के मंत्रालय का गठन कर दिया। इसके बाद यह विषय नवगठित मंत्रालय के अधीन आ गया।

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