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ग से गांधी नहीं, गोली बोलती है कांति

बमुश्किल 12-13 वर्ष की है कांति हेंब्रम। हजारीबाग के इचाक थाना क्षेत्र के पौड़ेया गांव की रहनेवाली यह लड़की अपनी उम्र की दूसरी लड़कियों की ही तरह दिखती है। भोली-भाली और मासूम। लेकिन कांति दूसरी लड़कियों से कई मायनों में अलग है। इस उम्र में बच्चे वर्दी और हथियार देखकर रोने लगते हैं। अकेले होने पर भी रोते हैं। जंगल में तो कतई नहीं रह सकते। लेकिन कांति की बात करें तो बंदूक उसके खिलौने हैं। शूट, फायर, अटैक और पोजिशन जसे शब्द उसकी जुबान पर हैं। पिछले दो महीने से जंगल में ‘साथियों’ के साथ ट्रेनिंग ले रही थी कांति। ‘ग’ से गांधी की बजाय बजाय गोली की भाषा बोलनेवाली यह लड़की अब हजारीबाग पुलिस के कब्जे में है। गांव के स्कूल में पांचवी कक्षा में पढ़नेवाली कांति हेंब्रम को दो माह पहले नक्सली सब जोनल कमांडर नीतीश उर्फ जोधा साव घर से घसीट कर ले गया था। बच्ची का कहना है कि जब उसके पिता भुवनेश्वर हेंब्रम और मां ने विरोध किया तो नक्सलियों ने बंदूक उनकी ओर तान दी थी और चुप रहने को कहा था। कांति रोती रही,लेकिन नक्सली मानने को तैयार नहीं थे। विष्णुगढ़ के सुंदर मांडू गांव में मुठभेड़ के बाद पुलिस ने कांति को गिरफ्तार किया है। पूछ-ताछ के दौरान बताती है कि वह नारी मुक्ित संघ के लिए काम करती है। हर गांव में संगठन खड़ा हो रहा है। सदस्यों को पांच रुपये की रसीद दी जाती है। एक बार वह संगठन छोड़कर भागने की कोशिश कर रही थी। उसे पकड़ लिया गया था। उसने पुलिस को बताया है कि वह जिस दस्ते के साथ घूमती थी, उसमें 26 सदस्य थे। नक्सली जब उसे ले गये, उसके परिवार के लोग दहशतजदा थे। इसकी सूचना पुलिस को नहीं दी गयी। कांति को पढ़ने और खेलने का शौक है, लेकिन नक्सलियों ने उसका बचपन छीन लिया। पूछ-ताछ के दौरान उसने कई महत्वपूर्ण जानकारियां पुलिस को दी है।

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