दौलत बेग ओल्डी एयर बेस फिर सक्रिय - दौलत बेग ओल्डी एयर बेस फिर सक्रिय DA Image
15 नबम्बर, 2019|11:40|IST

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दौलत बेग ओल्डी एयर बेस फिर सक्रिय

लद्दाख में दौलत बेग ओल्डी (डीबीओ) एयर बेस को सक्रिय करने का एक उद्देश्य तो यह है कि वहां तैनात सैनिकों को तुरंत आवश्यक सामग्री और हथियार उपलब्ध कराने के साथ ही उन्हें सुगमता से लाया- ले जाया जा सके ताकि उनका हौसला बुलंद रहे। दूसरा अघोषित मकसद चीन की घुसपैठ की आदत पर अंकुश लगाना है। इस स्थान को दौलत बेग ओल्डी इसलिए कहा जाता है क्योंकि पुराने जमाने में दौलत बेग नाम का एक भारतीय व्यापारी रेशम मार्ग से तिब्बत से तिजारत किया करता था। एक बार खराब मौसम में वह और उसके कई साथी मारे गए। ओल्डी का अर्थ कब्र है और जहां डीबीओ है, उसी के आस-पास उसकी कब्र भी थी। इसलिए इस स्थान को दौलत बेग ओल्डी कहा जाता है। यह इलाका चीन के कब्जे वाले अक्साई चिन, काराकोरम मार्ग और तिब्बत से लगा हुआ है। चूंकि यह ऐसा क्षेत्र है जहां पक्का बेस बनाना संभव नहीं है लिहाजा थल सेना के ही सैनिकों को विमान यातायात नियंत्रण और मौसम विज्ञान का प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह एडवांस्ड लैंडिंग ग्राउंड है और यह लॉजिस्टिक्स उपलब्ध कराने के साथ ही सैनिकों का मनोबल ऊंचा करने में भी सहायक होगा।ड्ढr जब भी जरूरत होगी उनकी मदद के लिए हेलीकॉप्टर ही नहीं बड़ा विमान भी उपलब्ध होगा। इस अड्डे पर फाइटर विमान न रखने का कारण यह है कि यह चीनी सीमा के बिल्कुल करीब है। दूसरी ओर से तोपों से ही विमान उड़ाए जा सकते हैं। वैसे भी अब भारतीय वायुसेना के पास उड़ान के दौरान ईंधन भरने की क्षमता आने के बाद विमानों को कहीं से भी उड़ा कर सीमा पर लाया जा सकता है।ड्ढr चूंकि जून से अक्तूबर तक गर्मी के कारण हवा और भी हल्की हो जाती है लिहाजा इन महीनों में विमान सिर्फ सामग्री पहुंचाने या इक्का-दुक्का सैनिक को ही वापस लाने का काम कर सकते हैं। सर्दियों में यादा सैनिकों को लाया जा सकता है। वैसे हेलीकॉप्टर की मदद से भी सैनिकों को लाया या ले जाया जा सकता है लेकिन इसमें वक्त यादा लगता है और क्षमता कम रहती है। चीन की ओर से खतरे को देखते हुए सीमा सड़क संगठन बड़े पैमाने पर सीमावर्ती इलाकों में सड़कें बनाने में जुटी है। थल सेना भी ब्रिटेन से हल्की तोपें खरीदने की प्रक्रिया में हैं। सड़कों के अभाव में इन तोपों को विमान या हेलीकॉप्टर से सीमा पर उतारा जा सकता है। हाल ही में भारत ने अग्नि-3 के सफल परीक्षण किए हैं जो चीन के कई शहरों को अपनी जद में ले सकती है। चीन की राजधानी बीजिंग तक मार करने के लिए अब अग्नि-4 मिसाइल तैयार की जा रही है। भारत चीन को यह संकेत भी देना चाहता है कि वह जरूरत से यादा दुस्साहस न करें क्योंकि अब 1ौसे हालात नहीं हैं। स्मरण रहे कि चीन के साथ 1े युद्ध में भारतीय वायुसेना को नहीं उतारा गया था लेकिन अब भारतीय वायुसेना के पास चीन से भी यादा प्रभावशाली विमान हैं।

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