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अल्पसंख्यकों कल्याण: जिम्मेदारी उधार के अफसरों पर

राज्य में अल्पसंख्यकों का कल्याण उधार के अधिकारियों के भरोसे है। अधिकारी ही नहीं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में मंत्री को भी उधार का ही माना जा रहा है। इस विभाग में अतिरिक्त प्रभार में रहने के कारण अधिकारी यहां पूरा समय नहीं दे पा रहे हैं और नतीजा यह हो रहा है कि कई महत्वपूर्ण फैसले या तो लिए नहीं जा रहे हैं अथवा उनका अनुपालन नहीं हो पा रहा है। हाल में अल्पसंख्यक छात्रों की छात्रवृत्ति के फार्म समय पर केन्द्र सरकार को नहीं भेजे जाने के मामले को लेकर विभाग की किरकिरी भी हुई थी।ड्ढr ड्ढr हाल ही में विभाग के मंत्री बने शाहिद अली खां विज्ञान और प्रोद्यौगिकी विभाग के भी मंत्री हैं। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में उनके दीदार शायद ही हो पाते हों। वैसे सचिवालय के बैरक स्थित विभाग में जाने पर लोग बताते हैं कि अभी मंत्रीजी का कक्ष बन रहा है और इसके पूरी तरह बन जाने के बाद ही मंत्रीजी यहां बैठेंगे। विभाग के सचिव अफाल अमानुल्लाह गृह विभाग के प्रधान सचिव हैं। अब गृह विभाग में इतने काम होते हैं कि उनके लिए अल्पसंख्यक कल्याण में पर्याप्त समय देना मुश्किल है। वैसे विभाग के कर्मी बताते हैं कि इसके बावजूद श्री अमानुल्लाह समय निकालकर विभाग में अवश्य चले आते हैं। इधर राज्य सरकार ने सुन्नी वक्फ बोर्ड का सचिव एक ऐसे अधिकारी को बनाया है जिनके पास पर्यटन निगम के प्रबंध निदेशक का भी काम है। नतीजा यह हो रहा है कि वक्फ बोर्ड की संपत्ति को अतिक्रमण से मुक्त कराने संबंधी फैसले अधर में लटके हुए हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार भुसौला दानापुर में वक्फ की करोड़ों की संपत्ति को अतिक्रमण से मुक्त कराने का फैसला फरवरी में ही हो चुका है और सभी अधिकारियों को पत्र भी भेजा गया है लेकिन इसे अमल में नहीं लाया जा सका है।

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