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पंचायत प्रतिनिधियों के हौसले बुलंद

गया जिला परिषद की अध्यक्ष को लेकर आए हाईकोर्ट के फैसले के बाद पूर राज्य के वैसे पंचायत जनप्रतिनिधियों का हौसला बढ़ा है जो किसी न किसी मोर्चे पर अफसरशाही से जूझ रहे हैं। ऐसे जनप्रतिनिधियों की भीड़ पंचायती राज विभाग के दफ्तर में बढ़ने लगी है। पंचायती राज विभाग ने ही मगध प्रमंडल के आयुक्त के फैसले को रद्द करते हुए गया जिप के अध्यक्ष को अपने पद पर बने रहने का आदेश दिया था। इसके बाद पंचायती राज सचिव और मगध प्रमंडल के आयुक्त में ठन गई थी। बाद में हाई कोर्ट ने पंचायती राज विभाग के फैसले को सही ठहराया।ड्ढr ड्ढr पंचायती राज विभाग पहुंचने वाला कोई जनप्रतिनिधि अपने प्रखंड के बीडीओ से परशान है तो किसी का कहा जिला पंचायती राज अधिकारी ही नहीं सुनता है। कहीं पंचायत सचिव ही ग्राम सभा के फैसलों को लागू करने में ना-नुकूर कर रहे हैं और इसके कारण दोनों में तनाव है। मात्र यही नहीं ऐसे लोग भी विभाग में पहुंच रहे हैं जो जनप्रतिनिधियों से हलकान हैं। सबसे ज्यादा उपमुखिया मुखिया की शिकायत लेकर आकर रहे हैं। पंचायती राज विभाग के प्रधान सचिव पंचम लाल कहते हैं कि यह न्याय के दिखने का असर है।ड्ढr ड्ढr गया की जिप अध्यक्ष शोभा कुमारी भी विभाग में पहुंची थी। विभाग ने 27 मई को ही उन्हें अध्यक्ष पद पर बहाल करने के संबंध में पत्र जारी कर दिया था। विभाग ने इस पत्र की प्रति मगध प्रक्षेत्र के डीआईाी, गया के एसपी और सदर डीएसपी को भी भेज दी थी ताकि जिप अध्यक्ष के पदभार ग्रहण में कोई दिक्कत नहीं हो। हाई कोर्ट के फैसले के बाद अब लोग इस बात पर हैरत में हैं कि पंचायती राज विभाग के प्रधान सचिव की ओर से अदालत में किसी अधिवक्ता ने पक्ष नहीं रखा।

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