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पब्लिक स्कूल देते हैं पार्टियों को चंदा

अदालत के हस्तक्षेप और सामाजिक कार्यकर्ताओं के तमाम हो-हल्ले के बावजूद अगर पब्लिक स्कूलों की मनमानी नहीं रुकती तो इसकी कोई न कोई तो वजह तो होगी ही। इसी वजह की पड़ताल में कुछ ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जो पब्लिक स्कूलों को डोनेशन देने वाले अभिभावकों को यकीनन हतप्रभ कर देंगे। बच्चों के प्रवेश के दौरान पब्लिक स्कूल स्टूडेंट वेलफेयर के नाम पर अभिभावकों से चंदे के रूप में मोटी रकम लेते हैं। हिन्दुस्तान के पास कुछ ऐसे दस्तावेज हैं, जो कहते हैं कि राजधानी के पब्लिक स्कूल राजनीतिक गलियारों में अपनी पकड़ बनाने के लिए पार्टियों को चंदा देते हैं। यह जानकारी सामाजिक कार्यकर्ता अफरोज आलम साहिल ने चुनाव आयोग से आरटीआई के तहत जुटाई है। स्कूलों से चंदा मिलने का मसला दिलचस्प है। कागजातों में चंदा देने वाले अधिकांश स्कूलों के नाम के आगे केयर ऑफ में कुछ चौंकाने वाले नाम हैं। कांग्रेस को मिले चंदे में सेंट लारेंस कॉन्वेंट और सांईं एजुकेशनल सोसायटी के आगे केयर ऑफ अरविंदर सिंह लवली लिखा है। वैसे, शिक्षा मंत्री लवली ने साफ कहा कि वे किसी स्कूल से संबंधित नहीं हैं। चंदा पार्टी को डोनेशन के रूप में नहीं रीलिफ फंड को दिया गया है। इसी तरह भारती पब्लिक स्कूल और सरस्वती कोऑपरेटिव टीसी सोसायटी के बाद केयर ऑफ रमेश पंडित लिखा है। लगता है, स्कूल भी औद्यौगिक घरानों की तरह बिजनेस रूल्स का पालन कर रहे है और राजनीतिक दलों पर अपनी पकड़ बनाए रखना चाहते हैं। कई वेलफेयर व रिसर्च एसोसिएशन भी चंदा देने में पीछे नहीं हैं। भाजपा को पीछे न समझें। अकीक एजुकेशन सेंटर ने इसे 75,00,000 रु. चंदे के तौर पर दिए हैं।

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