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जनता दरबार में आने पर 107 का मुकदमा

लगता है बिहार की पुलिस ने ‘न सुधरने’ की कसम ही खा ली है। शायद तभी जनता दरबार में आने वालों का पुलिस द्वारा अपने अंदाज में ‘इलाज’ हो रहा है। बिदुपुर का थानाप्रभारी जनता दरबार में आने वालों पर 107 का मुकदमा ठोंक देता है। घोसी में सात वर्ष की बच्ची पर भी मुकदमा हो जाता है। आरा के कृष्णानगर थाने का चौकीदार इलाके में तांडव मचाता है लेकिन पुलिस कुछ भी नहीं करती। सोमवार को अपनी पुलिस की करतूतों से बार-बार चकित होते रहे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार।ड्ढr ड्ढr वैशाली के बिदुपुर में विष्णुदेव के घर के पास की सड़क को दबंगों ने मई, 06 में बन्द कर दिया। तब से वह आठ बार जनता दरबार में आ चुका है लेकिन कोई राहत नहीं मिली। उसने बताया कि जब भी जनता दरबार से लौटता है, थाना प्रभारी 107 का मुकदमा कर देता है। मुख्यमंत्री ने इस मामले में डीजीपी को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिये। घोसी से आई एक महिला ने बताया कि दबंगों ने उसके पति और सात वर्ष की बच्ची पर मुकदमा कर दिया है। जनता दरबार में दस बार आने पर भी छपरा की भगवतिया देवी की 3 बीघा जमीन पर स्थानीय दबंगों का कब्जा बरकरार है। मुख्यमंत्री से कार्रवाई का भरोसा मिलता है लेकिन पुलिस बात सुनती ही नहीं। सुपौल के अभिषेक आनन्द को गत वर्ष नवम्बर में एक साधु ने अपहृत कर लिया। उसकी मां मनीषा देवी चार बार जनता दरबार का चक्कर लगा चुकी है। आरा स्थित कृष्णानगर थानाक्षेत्र के जनार्दन साह और मदन साह ने उधार सामान देने से मना किया तो राजकुमार यादव और स्थानीय चौकीदार ने उनके घर पर मारपीट की। इससे इंद्रावती देवी का हाथ-पांव, देवयंती कुंअर और हीरामती देवी का हाथ टूट गया है। इसके बावजूद डीएसपी ने आरोपियों को क्लीनचिट दे दी। जनता दरबार में आए जनार्दन साह के पास मुख्यमंत्री खुद गये और आवेदन लेकर डीजीपी को कार्रवाई का निर्देश दिया।

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