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कार्य बहिष्कार एक सप्ताह तक जारी रहेगा

रांची सिविल कोर्ट के वकीलों का कार्य बहिष्कार आंदोलन सात जून तक जारी रहेगा। यह फैसला दो जून को जिला बार एसोसिएशन की आमसभा में लिया गया। तय किया गया कि शनिवार को पुन: आमसभा होगी, जिसमें आगे की रणनीति तैयार की जायेगी। हालांकि इस निर्णय पर वकीलों में मतभेद है। सभा के बाद सैकड़ों वकीलों ने एसोसिएशन के सचिव एसएस ओझा से कहा कि उनकी लड़ाई न्यायायुक्त से है। ऐसे में एगीक्यूटिव कोर्ट के कार्य बहिष्कार का क्या औचित्य है। वे चार जून को बैठक आहूत कर आमसभा में लिये गये निर्णय को संशोधित करने की मांग कर रहे थे।ड्ढr वकीलों का कार्य बहिष्कार आंदोलन पिछले चार दिनों से चल रहा है। वकीलों का आरोप है कि बिना पूर्व सूचना के उनके बैठने के स्थान से कुर्सी-टेबल हटा दिये गये। दो जून को सुबह 8.30 बजे सैकड़ों वकील कोर्ट परिसर में जुट गये। उन्होंने नारबाजी की। इसके बाद अध्यक्ष शंभू अग्रवाल और सचिव एसएस ओझा की उपस्थिति में बैठक हुई। चंद वकीलों ने कहा कि अभी स्कूल-कॉलेजों में एडमिशन का समय है। ऐसे में एफिडेविट की आवश्यकता पड़ती है। कार्य बहिष्कार के कारण आम लोग परशान हो रहे हैं। बार के रवेन्यू पर भी विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। इन्होंने सिर्फ न्यायायुक्त के कोर्ट के कार्य बहिष्कार का प्रस्ताव रखा। दूसरी ओर अन्य वकीलों ने कहा कि उनके मान-सम्मान को ठेस पहुंची है। लिहाजा सिविल और एगिक्यूटिव कोर्ट में बहिष्कार जारी रखा जाये। सर्वसम्मति से इसे पारित भी कर दिया गया। बाद में सचिव ने विरोध कर रहे वकीलों को आश्वस्त किया बुधवार को आमसभा बुला कर निर्णय पर फिर से विचार किया जायेगा।हवाई अड्डा पर बम की अफवाह से अफरा-तफरीसही पाकर जवानों को सूचना दी गयी कि यह मॉक टेस्ट था। ऐसा इसलिए किया गया कि अचानक कभी हो हमला जाये, तो जवान उससे कैसे निपटेंगे।

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