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नयी रांची : टीम पुनर्वास नीति का अध्ययन करने छत्तीसगढ़ जायेगी

राज्य की नयी राजधानी बनाने की कवायद तेज हो गयी है। सरकारी कार्य के लिए जमीन अधिग्रहण के मामले में छत्तीसगढ़ की नीति का अध्ययन किया जायेगा। इसके लिए पदाधिकारियों की एक टीम रायपुर जायेगी। रायपुर में नयी राजधानी बन चुकी है। वहां की नीति के काफी सराहा गया है। इस आशय का फैसला प्रशासनिक स्तर पर लिया जा चुका है।ड्ढr पिछले दिनों सीएम मधु कोड़ा ने नयी रांची के कार्य की धीमी गति पर काफी नाराजगी जाहिर की थी। उनके निर्देश पर सीएस एके बसु ने रांची जिला प्रशासन को काम तेज करने का निर्देश दिया था। स्थानीय स्तर पर बात सामने आयी कि छत्तीसगढ़ में जो सरकारी कार्य के लिए पुनर्वास नीति बनी है, उसके अनुपालन में सरकार को कोई परशानी नहीं हुई थी, लिहाजा वहां की पुनर्वास नीति का अध्ययन जरूरी है। रांची के एलआरडीसी और कांके, रातू के सीओ रायपुर जायेंगे। वहां की स्थिति के अध्ययन के आधार पर सरकार को रिपोर्ट सौंपेंगे। सरकार की ओर से संभवत: राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव आरएस पोद्दार अध्ययन टीम का नेतृत्व करंगे। सरकार अधिग्रहण के मामले में फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। संभावित जमीन अधिगहण के मामले को लेकर व्यापक पैमाने पर धरना, प्रदर्शन और रैली का आयोजन होता रहा है। इसमें प्रदर्शनकारियों के तेवर उग्र रहते हैं। वैसे सरकार इस बात को स्वीकार भी करती है कि ग्रामसभा और स्थानीय लोग नहीं चाहेंगे, तो उनकी जमीन का अािग्रहण नहीं होगा।ड्ढr 35 गांव होंगे समाहितड्ढr रांची के एलआरडीसी कार्तिक कुमार प्रभात ने कहा है कि नयी रांची के लिए फिलहाल कांके-पिठोरिया पर ही सरकार का ध्यान केंद्रित है। इस क्षेत्र के 35 गांव का सव्रे कार्य चल रहा है। नयी रांची में ये गांव समाहित होंगे। सरकार किसी भी रैयत की जमीन तभी लेगी, जब उनको मुआवजा और पुनर्वासित कर लिया जायेगा। इसी का प्रावधान छत्तीसगढ़ की नीति में है। यह नीति उद्योंगों के विस्थापन और पुनर्वास नीति से अलग होगी।

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