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अब मोबाइल स्कूल

ए-फॉर एपल, बी फॉर बॉल . यह आवाज झरिया के उन इलाकों में सुनाई दे रही है, जहां जमीन के नीचे क ोयले में आग लगी हुई है। वर्षो से पढ़ाई से वंचित बच्चों को पढ़ाया जा रहा है। झरिया के भू-धंसान वाले क्षेत्रों में अब मोबाइल स्कूल के माध्यम से बच्चों क ो शिक्षित करने का प्रयास किया जा रहा है। मोबाइल स्कूल के तहत इलाके में एक शिक्षक की नियुक्ित की गयी है। साइकिल पर लगे एक बक्से में रहता है स्कूल का सारा सामान। मास्टर साहब सुबह निर्धारित समय पर बच्चों एक जगह जमा करते हैं। किसी पेड़ के नीचे या फिर किसी खाली स्थान पर ब्लैक बोर्ड टंग जाती है और फिर शुरू हो जाती है कक्षा।ड्ढr दरअसल झरिया के कोयला खादानों में आग लगने के बाद इलाके क ो फायर जोन घोषित किया गया है। लेकिन इलाके में पहले की तरह ही लोग रह रहे हैं। इलाके के बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हुई है। इसी को ध्यान में रख कर मोबाइल स्कूल की शुरुआत की गयी। अब बच्चों की जुबान पर आवाज है- आधी रोटी खायेंगे, फिर भी स्कूल जायेंगे. ं

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