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राजधानी में शव के साथ वकील सड़क पर उतरे

हाईकोर्ट के वकील की पुत्री नीलिमा की पीएमसीएच शिशु वार्ड में हुई मौत तथा डाक्टरों द्वारा दौड़ा-दौड़ा कर पीटे जाने के विरोध में सोमवार को वकीलों और स्थानीय नागरिकों का गुस्सा फूट पड़ा। लोगों ने सुबह सात बजे से शव के साथ अशोक राजपथ को पांच घंटे तक जाम रखा। उधर पीएमसीएच के जूनियर डॉक्टर भी सोमवार की सुबह 0 बजे से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए। डॉक्टरों की हड़ताल के कारण इमरजेंसी सहित सभी ऑपरशन कार्य पूरी तरह बाधित रहे। दिनभर यही स्थिति रही। देर रात पीएमसीएच के अधीक्षक डा.ओ पी चौधरी ने कहा कि जूनियर डाक्टर मंगलवार की सुबह 7 बजे से काम पर लौटेंगे। माना जा रहा है कि एमसीआई के निरीक्षण की वजह से उन्हें हड़ताल तोड़ने के लिए बाध्य किया गया।ड्ढr ड्ढr पीएमसीएच के डॉक्टरों के विरुद्ध फूटे आक्रोश के कारण पीएमसीएच का मुख्य द्वार तीन घंटे तक बन्द रहा। पुलिस को जाम हटाने के लिए कई बार बल प्रयोग करना पड़ा। नीलिमा की मौत के करीब 16 घंटों बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। डॉक्टरों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर बच्ची के शव के साथ श्री मल्लिक और उनका परिवार रातभर अस्पताल में भूख हड़ताल पर बैठा रहा। सोमवार की सुबह परिजन जब शव को लेकर पीएमसीएच के मुख्य प्रवेश द्वार पर पहुंचे तो स्थानीय नागरिकों का व्यापक समर्थन उन्हें मिला। हजार की संख्या में लोग सड़क पर जमे रहे और अशोक राजपथ को पांच घंटे तक जाम रखा। पटना हाईकोर्ट के वकील श्री मल्लिक और उनके परिजन बार-बार दोषी डॉक्टरों की गिरफ्तारी की मांग करते रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि चिकित्सीय लापरवाही के कारण बच्ची की मौत हुई। इधर आक्रोशित लोगों को हटाने के लिए पुलिस दस्ता आ धमका। देखते-देखते पीएमसीएच का प्रवेश द्वार छावनी में बदल गया। वज्र वाहन के साथ पहुंची पुलिस को जाम हटाने के लिए बल का प्रयोग करना पड़ा। डीएसपी संजय सिंह के आने के बाद जाम को हटाने में मदद मिली। मृतक नीलिमा के शव का दिन के दो बजे पोस्टमार्टम हुआ। पोस्टमार्टम के बाद श्री मल्लिक ने बच्ची का अंतिम संस्कार बांसघाट में कर दिया।

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