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सूबे में स्कूलों की संख्या बढ़ाएं : प्रो. सिन्हा

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि वह सूबे में स्कूलों की संख्या बढ़ाये। सूबे में स्कूली शिक्षा का माहौल बन गया है और दूर-दराज के गांवों में भी छात्र पढ़ने को उत्सुक हैं। जरुरत है छात्रों की संख्या के अनुपात में स्कूल मुहैया कराने की। बिहार दौर पर आयीं आयोग की अध्यक्ष प्रो. सांथा सिन्हा ने कहा कि बिहार में निर्धन एवं कमजोर तबके के बच्चों की शिक्षण व्यवस्था के लिए काफी काम हो रहा है। सर्वशिक्षा अभियान की मार्फत बाल पलायन को रोकने के दिशा में बढ़िया काम हो रहा है। पर सिर्फ पटना की बात करं तो यहां 47 स्कूल एक कमरा वाले हैं और 17 स्कूल मंदिरों में व 7 स्कूल मस्जिदों में चल रहे हैं। पटना के बीचो-बीच कमला नेहरु स्लम एरिया में 820 बच्चे हैं पर उनके लिए मात्र एक कमरा वाला प्राइमरी स्कूल हैं। उन्होंने कहा कि वे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मिलकर बाल अधिकार पर विस्तार से चर्चा करंगी।ड्ढr संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने कहा कि बाल श्रमिक के मामले में बिहार अभी देश में तीसर नम्बर पर हैं। यह संख्या कम करने के लिए राज्य सरकार प्रयत्नशील है। सर्वशिक्षा अभियान के तहत 11 से 14 वर्ष के वैैसे बच्चे जिनका स्कूल में नामांकन नहीं हुआ है, के लिए आवासीय सेतु पाठ्यक्रम केन्द्र चलाये जा रहे हैं। पूर सूबे में 1200 केन्द्रों में 70 हजार बच्चे पढ़ रहे हैं। ऐसे बच्चों को इन केन्द्रों में एक वर्ष की पढ़ाई कर उस लायक बनाया जा है कि वे अपनी उम्र के हिसाब से स्कूलों में नियमित पढ़ाई कर सकें। जमुई जिले में ऐसे कई केन्द्र बढ़िया काम कर रहे हैं। वहां स्कूलों की कमी है पर अभिभावक और बच्चे पढ़ने को लालायित हैं। इन केन्द्रों की मार्फत सीतामढ़ी से 2000 बाल श्रमिकों को पलायन से रोका गया है।

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