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माकपा ने मीडिया पर निकाली भड़ास

र्नाटक विधानसभा चुनावों में अपनी एकमात्र सीट बचाने में नाकाम माक्र्सवादी कम्युस्टि पार्टी (माकपा) ने अपनी भड़ास मीडिया पर निकाली है। पार्टी ने अपने मुखपत्र ‘लोकलहर’ में कहा है, ‘‘वामपंथ को और खासतौर पर सीपीआई (एम) को गरियाने के लिए हर वक्त तैयार, पूंजीवादी मीडिया के एक हिस्से ने इसका एक और मौका आखिरकार निकाल ही लिया।’’ पार्टी ने मुखपत्र में कहा, ‘‘जो लोग वाकई देश में धर्मनिरपेक्ष ताकतों को मजबूत होते देखना चाहते हैं, उन्हें वामपंथ को गरियाने के मौके खोजने की जगह, उसके सुझावों को गंभीरता से लेना चाहिए।’’ दरअसल, कर्नाटक में भाजपा की शानदार जीत और केंद्र में सत्ताधारी संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) की हार के लिए मीडिया के एक धड़े ने वाम दलों की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया था। मुखपत्र के अनुसार, ‘‘वामपंथ का यह बहाना कि वह सहयोगी भी है और विरोधी भी, यूपीए की समस्या की असली जड़ है।’’ किसी दक्षिणी राज्य की सत्ता पर पहली बार भाजपा के काबिज होने के पीछे माकपा मुख्य कारण सांप्रदायिक ध्रुवीकरण को मानती है। मुखपत्र में कहा गया, ‘‘बेशक भाजपा के समर्थन में लगातार इस तरह बढ़ोतरी के पीछे अनेक कारक रहे हैं। इनमें सांप्रदायिक ध्रुवीकरण को बढ़ाए जाने की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, इसके लिए चिकमंगलूर में बाबा बुंदनगीर की दरगाह पर खड़े किए गए विवाद (जिसे भाजपा ‘दक्षिण का अयोध्या’ विवाद कहती है), हुबली में ईदगाह मैदान पर खड़े किए गए विवाद और गोलवलकर की जन्मशती के आयोजनों के सिलसिले में राज्य में जगह-जगह भड़काये गए सांप्रदायिक दंगों का, जमकर इस्तेमाल किया गया।’’ माकपा ने आगे कहा है कि जनता दल (सेकुलर) को अपने घोर अवसरवाद की कीमत चुकानी पड़ी है। ‘‘बेशक, कर्नाटक में माकपा विधानसभा की अपनी इकलौती सीट नहीं बचा पाई और कुछ सौ वोटों के मामूली अंतर से उसके उम्मीदवार को हार का मुंह देखना पड़ा।’’

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