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माइक्रोबैंकिंग से रोचागार स्थापित करं महिलाएँ

बैंकिंग ऐसी होनी चाहिएोिसका फाइनेन्स कन्ट्रोल महिलाओं के हाथ में हो। इस बात को ध्यान में रखकर ही बैंक आसान शर्तो पर महिलाओं को लोन दें। ग्रामीण श्रमिक महिलाओं को बचत करने की प्रेरणा दीोाए और स्वंय सहायता समूह बनवाकर छोटे-छोटे रोगार स्थापित करवाएोाएँ। यह विचार इन्दिरा भवन में आयोित माइक्रोबैंकिंग विषयक संगोष्ठी में बैंकिंग क्षेत्र में काम करने वाली सतारा (महाराष्ट्र) संस्था की समाा सेविका चेतना गाला सिन्हा ने व्यक्त किए। श्रीमती सिन्हा यहाँ बतौर मुख्य अतिथि बोल रही थीं।ड्ढr श्रीमती चेतना ने संगोष्ठी में महाराष्ट्र के ग्रामीण क्षेत्र में श्रमिक महिलाओं के लिए खोले गए बैंक ‘माणदेशी महिला सहकारी बैंक’ के अस्तित्व व संघर्ष के अनुभव बाँटें। उत्तर प्रदेश की महिलाओं को भी यह सुविधा मिलोाए तो प्रदेश की अशिक्षित व अर्धशिक्षित महिलाएँ आत्मनिर्भरता से विकास की ओर कदम बढ़ा सकती हैं। महिला आयोग की अध्यक्ष आभा अग्निहोत्री ने भी ग्रामीण महिलाओं द्वारा स्वत: संचालित माइक्रोबैंकिंग को अच्छा विकल्प बताया। प्रमुख सचिव पंचायत राा आरके सिन्हा ने पंचायत महिला एवं युवा शक्ित अभियान के तहत ग्रामीण महिलाओं को बैंकिंग के गुण सिखाने परोोर दिया। संगोष्ठी में महिला कल्याण विभाग के अधिकारी व प्रदेश की कई स्वंयसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि भारी संख्या में उपस्थित हुए। ड्ढr ं

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