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4 साल में भी नहीं बन सका एक्वेरियम

वन एवं पर्यावरण विभाग का हाल खस्ता है। कोई भी योजना समय पर नहीं पूरी होती। इसके पीछे विभाग में ही आपसी खींचतान और इच्छाशक्ित का अभाव बताया जाता है। विभागीय मंत्री सुधीर कुमार महतो भी विकास मामलों में दिलचस्पी नहीं लेते हैं। वित्तीय वर्ष 2004-05 में विभाग ने ओरमांझी स्थित जविक उद्यान में एक एक्वेरियम बनाने की योजना बनायी थी। सवा करोड़ की योजना पर काम भी शुरू हुआ। 70 लाख की राशि खर्च कर भवन तैयार कर लिया गया। लेकिन मछली रखने के लिए शीशे का एक्वेरियम नहीं बन सका।ड्ढr आधिकारिक सूत्रों के अनुसार मुंबई की एक कंपनी मोल्टानियुस एक्वा को करीब 50 लाख का ठेका दिया गया था। इस कंपनी को विदेश से विशेष किस्म का शीशा आयात कर एक्वेरियम का निर्माण करना था। लेकिन शीशे का महल अब तक हवामहल ही साबित हुआ है। इस बाबत पूछने पर सीसीएफ विकास जेबी जौहर ने बताया कि वन्य प्राणी विभाग के अधिकारी इसके लिए जिम्मेवार हैं। बताया गया कि रांची में बननेवाला यह देश का सबसे बड़ा मछलीघर होगा। यह चिड़ियाघर में आनेवाले पर्यटकों को भी आकर्षित करगा। इससे विभाग का राजस्व भी बढ़ेगा।

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