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बिहार में बढ़े कुत्तों के शौकीन

‘कुत्तों तुम्हारे दांत तो मोतियों जैसे चमक रहे हैं।’अगर कुत्तों की भाषा समझ में आए तो वे शायद यही कहेंगे-क्यों न हो मैं अब टूथपेस्ट और ब्रश जो इस्तेमाल करता हूं। कुत्तों का वह जमाना लद गया जब उनकी सिर्फ दो ही रूटीन हुआ करती थी। एक खाने की और दूसरी पट्टे में बंध कर टहलने की। बेहतरीन नस्ल के कुत्तों के बढ़ते क्रज ने उनकी लाइफ स्टाइल में भी जबरदस्त क्रांति ला दी है। बिहार भी अब बड़े डॉग मार्केट के रूप में अपनी पहचान बना रहा है। पटना में कुत्तों के लिए अब वे सार प्रोडक्ट उपलब्ध हैं जिसे कल तक सिर्फ इंसान इस्तेमाल कर रहे थे। मसलन विदेशी परफ्यूम, डियोड्रंट, बेहतरीन टूथपेस्ट-ब्रश और शैम्पू भी।ड्ढr ड्ढr समृद्धि और आधुनिकता के पायदान पर चढ़ते बिहार और पटना में बढ़िया नस्ल के कुत्तों के बढ़ते क्रज का इसे संकेत माना जा सकता है। बड़े-बड़े राजनेताओं से लेकर आईएएस अधिकारियों को भी कुत्तों ने अपना दीवाना बना रखा है। एक से एक बेहतरीन नस्ल के कुत्ते उनके अहाते और ड्राइंग रूम में चहलकदमी करते दिख जाएंगे। जानकारों की मानें तो लोजपा सांसद सूरजभान सिंह, पूर्व मंत्री अशोक चौधरी के पास ‘सेंट बनार्ड’, विधान सभाध्यक्ष उदय नारायण चौधरी और आईएएस अधिकारियों में बी.बी.श्रीवास्तव, अनिल कुमार, राजेश गुप्ता के पास जर्मन शेफर्ड है। तीन आईएएस दीपक कुमार, प्रत्यय अमृत और गिरीश शंकर के पास टीवी पर अक्सर दिखने वाला ‘पग’ भी है। जानकारों के अनुसार बिहार में औसतन रोज 600-700 बेहतर नसल के कुत्ते खरीदे-बेचे जाते हैं। बड़े नस्ल के कुत्तों में रोट वीलर, सेंट बनार्ड, आयरिश शेटर, नेपोलियन मास्टिफ, गेट्र डेन और जर्मन शेफर्ड की जबरदस्त मांग है बिहार में। छोटे नस्ल में पग, डेसंड, चि-हुआ-हुआ, ल्हासा और बीगल का क्रज है। बड़े नस्ल के अच्छे कुत्ते की कीमत (कागजात के साथ) 1 लाख रुपए तक है।

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