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मोदी पर मशक्कत जारी

बिहार के मुख्यमंत्री सुशील मोदी के सवाल पर पार्टी का सर्वोच्च नीति निर्धारण मंच संसदीय बोर्ड जिस तरह से फैसला लेने में नाकाम हुआ है, उससे यह मंच अब अप्रसांगिक सा हो गया है। पार्टी आलाकमान खुद किस तरह गुटबाजी का शिकार है यह उसका जीवंत उदाहरण है। अब 8 जून को विधायक दल की बैठक में मोदी के भविष्य का फैसला होगा। इस फैसले के बार में पार्टी सर्किल में कहा जा रहा है कि अब भविष्य में फैसले पार्टी फोरम में न हो कर सड़कों में तय किये जायेंगे। याद रहे कि बीते एक माह से भी अधिक से मोदी को हटाने का सवाल पार्टी आलाकमान के पास विचाराधीन रहा है। इस सवाल को लेकर एक बार कोर कमेटी और दो बार संसदीय बोर्ड बैठ चुका है। मोदी की कार्यप्रणाली के विरोध में दो दर्जन से अधिक विधायकों ने पार्टी के केन्द्रीय नेतृत्व से मोदी को हटाने की मांग की है और ऐसा नही होने पर इस्तीफे देने की धमकी दी है। मोदी को लेकर पार्टी ने जिस तरह का मन बनाया है, उससे पार्टी कार्यकर्ता स्तब्ध हैं। बीते दिनों दिल्ली में हुई पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारणी में भी संगठन और उसके चेहर में भी इस तरह के अंतविर्रोध दिखे। पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ दिखे तो पार्टी के पीएम इन वेटिंग लालकृष्ण आडवाणी धर्मनिरपेक्षता की दुहाई देते हुये ईसाई और मुसलमानों को भी पार्टी में लाने की वकालत करते दिखे। जानकारों का कहना है कि बिहार विधायक दल की दिल्ली में बैठक बुलाने का फैसला हाईकमान के बीच अंतविर्रोधों का ही परिणाम है।

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