अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

बुनियादी शिक्षा की विसंगतियां

मृणाल पांडे का आलेख ‘निर्थक बहसें और असली चुनौतियां’ शीर्षक पढ़ कर मन आंदोलित हो गया। इस देश की शिक्षा व्यवस्थाएं सभी वोट तंत्र में जकड़ी हुई हैं। एक भारतीय नागरिक को उच्च शिक्षा सुलभ कराने, उसे अधिकाधिक सुविधाएं प्रदान करने के स्थान पर विभिन्न प्रकार के आरक्षणों में हमारी केन्द्रीय शिक्षा योजनाएं दम तोड़ रही हैं। बुनियादी शिक्षा की इन्हीं विसंगतियों को दूर किए बिना एक कल्याणकारी शिक्षा योजना की कल्पना भी नहीं की जा सकती।ड्ढr आईआईएम, आईआईटी और एम्स में मची कोटे, वजीफे की मारा-मारी सचमुच व्यवस्था के पंगु होने की अभिव्यक्ित प्रदान करती है। क्या कारण है कि हम आज 60 वर्ष बाद भी 50 प्रतिशत आबादी वाली महिलाओं को आरक्षण नहीं दे रहे हैं, क्योंकि उसमें बाधाएं डाल रहे हैं। आज भी एससीएसटी जातियों के लाखों लोग आरक्षण के बावजूद बेकार व बेरोगार घर बैठे कुंठा का शिकार हो रहे हैं। मलाई खाने वाले औरों के लिए छाछ भी नहीं छोड़ रहा है।ड्ढr दयानंद वत्स, बरवाला, दिल्लीड्ढr आरक्षण की मारामारीड्ढr देश में चारों ओर आरक्षण का ही शोर है, लगता है इसके अतिरिक्त कोई समस्या है ही नहीं। वोट की राजनीति इसे थमने नहीं देती। निश्चित रूप से समाधान ने समस्या का रूप ले लिया जिसका कहीं अंत नहीं दिखता। आवश्यकता है अच्छी शिक्षा की और आने वाले बच्चों को मुकाबले के लिए तैयार करने की ताकि उनमें आत्मविश्वास जागृत हो और वे अपने और देश के लिए कुछ कर सकने में समर्थ हों। किसी भी प्रकार का आरक्षण इसके विपरीत की मानसिकता को बढ़ावा देता है जो राष्ट्र के स्वास्थ्य के लिए उचित नहीं है।ड्ढr बी. एस. नागर, राजोरी गार्डनड्ढr आरुषि और मीडियाड्ढr आरुषि हत्याकांड में पुलिस के रवैए पर चारों तरफ से उंगली उठ रही है, पर मीडिया ‘मीडिया ट्रायल’ से बाज नहीं आता। वह अपना टीआरपी बढ़ाने के चक्कर में अपने उत्तरदायित्व से विमुख एवं संवेदनशीलताविहीन हो मर्यादा एवं शिष्टाचार को ताक पर रख विवेकशून्य हो काम करता है। जो समाज के पथप्रदर्शक हैं आज पथभ्रष्टक बनते जा रहे हैं। आरुषि हत्याकांड पर टीवी पर जिस तरह इस केस का पोस्टमार्टम हो रहा था एक मासूम पर जो कीचड़ उछाले जा रहे हैं वह भी घंटों। यह न्यायसंगत नहीं निंदनीय है।ड्ढr आर. बी. यादव, दिल्लीड्ढr बिग बी की नसीहतड्ढr स्वास्थ्य मंत्री अम्बुमणि रामदास द्वारा फिल्मों में शराब के दृश्यों पर नाराजगी जाहिर करते हुए इन्हें समाज के हित में अवांछनीय बताया है। इसी के जवाब में अमिताभ बच्चन ने स्वास्थ्यमंत्री को नसीहत देते हुए कहा है कि पहले मंत्री महोदय अपने अधीनस्थ कार्यालयों के अफसरों एवं बाबुओं को मदिरापान का परित्याग करने का आदेश देने की जुर्रत तो करं। पर्दे के दृश्य तो मात्र काल्पनिक और कोरा अभिनय है, जबकि सरकारी अफसरों का धूम्रपान और मद्यपान एक हकीकत है।ड्ढr शराब निर्माताओं को लाइसेंस एवं शराब बिक्रेताओं को पग-पग पर दिए गए ठेके क्या समाज के हित में हैं? ऐसे परिदृश्य में बिग बी की नसीहत बिल्कुल सटीक एवं समर्थन योग्य है।ड्ढr युधिष्ठिर लाल कक्कड़, गुड़गांव

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: बुनियादी शिक्षा की विसंगतियां