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मजदूरी मांगने पर मासूम को बंधक रखा

पेट के लिए घर-बार छोड़ा। परदेश में रहकर दिन-रात हाड़तोड़ मेहनत की। बदले में मजदूरी तो मिली नहीं, घर लौटने पर भी बंदिश लगा दी गयी। किसी तरह जान बचाकर पति-पत्नी तो निकल भागे लेकिन दरिंदों ने तीन साल के मासूम बेटे को ही बंधक बना कर रख लिया। गुमला भरनो के डोंबा गांव के रहनेवाले अरुण कुमार महतो की यह दुखभरी कहानी किसी को भी अंदर से हिला कर रख देगी।ड्ढr अरुण और तारामणि अपने मासूम नीतिन की जान की सलामती की दुआ मांग रहे हैं, उसकी सही-सलामत वापसी के लिए अफसरों से गुहार लगा रहे हैं। नन्हा नितिन अभी यूपी के आजमगढ़ में ईंट भट्टा चलानेवाले मो शमीम के यहां नजरबंद है। उसके मां-बाप झारखंड के एक अफसर की सिफारिशी चिट्ठी लेकर आजमगढ़ प्रशासन से न्याय की भीख मांगने गये हैं। ईंट भट्ठे में कार्यरत डोंबा गांव के ही बाबूलाल उरांव की हत्या कर दी गयी है और पावर्ती, मंगल और बीरंद्र उरांव लापता हैं।ड्ढr बाबूलाल उरांव के बार में जानकारी लेने आजमगढ़ जिले के रमनापाड़ थाना से पुलिस भरनो आयी थी। पुलिस के साथ ही अरुण और तारामणि अपने बेटे को लाने के लिए रमनापाड़ थाने के चांदपट्टी गये हैं। उनके साथ एक मजदूर नेता राकेश सिंह भी हैं। तीन जून इन्होंने आवेदन जिलाधिकारी को दिया है। इसमें बच्चे के साथ अन्य मजदूरों को भी मुक्त कराने को कहा गया है।ड्ढr मजदूर जो बंधक हैंड्ढr गुमला से मंजू देवी, मंगल भोक्ता, पूनम कुमारी, मनोज उरांव, पंची देवी, शनिचर उरांव, विरंद्र उरांव, हरखू उरांव, सुमित्रा देवी और कलेश्वरी देवी तथा पलामू के लेस्लीगंज जिले के पावर्ती देवी और प्रमिला देवी शामिल हैं।

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  • Web Title: मजदूरी मांगने पर मासूम को बंधक रखा