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पीएमसीएच प्रकरण: विपक्ष ने की न्यायिक जांच की मांग

सूबे के विपक्षी दलों ने कहा है कि पीएमसीएच में डाक्टरों का नहीं बल्कि गुंडा राज कायम हो गया है। मरीज व परिजन वहां जाने से अब डरने लगे हैं। एक-एक कर समाज के सभी प्रबुद्ध वर्ग की पिटाई हो रही हैं पर सरकार सोयी हुई है। विपक्षी दलों ने पीएमसीएच की स्थिति को नियंत्रित करने के लिए वहां अर्धसैनिक बलों की तैनाती और पत्रकारों की पिटाई मामले की न्यायिक जांच की मांग की है।ड्ढr ड्ढr सांसद राजनीति प्रसाद ने पीएमसीएच में पत्रकारों-छायाकारों की पिटाई की भर्त्सना करते हुए मुख्यमंत्री से दोषी डाक्टरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि नीतीश सरकार में पीएमसीएच का जितना नाश हुआ है उतना पिछले पचास साल में नहीं हुआ है। गत दिनों टाटा वार्ड में एक बच्चे को बेड से फेंक दिया गया। अधिवक्ता की बच्ची के मरने के बाद अधिवक्ता व उनकी पत्नी-बेटी को पीटा गया। ऐसे डाक्टर शायद ही देश के किसी कोने में हों। उन्होंने छायाकारों को पीटने वाले और हॉस्टलों में रहने वाले गुंडा किस्म के डाक्टरों को तत्काल वहां से निकालने की मांग की है। राजद के ही श्याम रजक ने भी घटना की तीव्र भर्त्सना करते हुए कहा है कि जिस तरह की सरकार रहेगी या जैसी सरकार चाहेगी उसके तंत्र भी उसी तरह काम करंगे। कांग्रस के प्रदेश प्रवक्ता (दिल्ली) अमलेन्दु पाण्डेय ने कहा है कि सरकार ऐसे डाक्टरों को चिह्न्ति कर उन्हें पीएमसीएच से बर्खास्त करे। नीतीश सरकार में अधिकाारियों के साथ डाक्टर भी अब आपा खो चुके हैं। कोई अपनी गलती सुनने को भी तैयार नहीं है। उन्होंने पीएमसीएच इमरजेंसी में अर्धसैनिक बलों की प्रतिनियुक्ित की मांग की है। कांग्रेस के प्रदेश सचिव सत्येन्द्र कुमार ने निन्दा करते हुए 24 घंटे के अन्दर दोषी डाक्टरों पर कार्रवाई की मांग की है। युवा राजद के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पासवान ने पत्रकारों पर हमले की न्यायिक जांच की मांग की है। प्रधान महासचिव विनोद शंकर पराशर ने कहा है कि पूर प्रदेश में अराजकता फैल गई है। सबने देखी पीएमसीएच के जूनियर डाक्टरों की गुंडईड्ढr पटना (हि.ब्यू.)। पीएमसीएच के जूनियर डॉक्टरों को आप ‘नेक्स्ट टू गॉड’ नहीं, ‘नेक्स्ट टू डॉन’कह सकते हैं। लोगों की जान बचाने वाले इन ‘भगवानों’ की गुंडई और मार करने का अंदाज गुरुवार को पूर पटना ने देखा।ड्ढr ‘रक्षक’ ही ‘भक्षक’ बने थे और आला उठाने वाले हाथों में डंडे, हॉकी स्टिक, धारदार हथियार और पिस्तौलें चमक रही थीं। अंधाधुंध पथराव करते इनको अगर कोई छोटा बच्चा देख ले तो शायद ही वह डॉक्टर और ‘खूंखार अपराधी’ में कोई फर्क कर पाए। गुरुवार को हड़ताल की कवरज के सिलसिले में पीएमसीएच गए ‘हिन्दुस्तान’ के दीपूराज समेत छायाकारों ने जब एक मरीज के परिजनों की पिटाई कर रहे जूनियर डाक्टरों की तस्वीर लेनी चाही तो उन लोगों ने जिस अंदाज में हमला किया वे कोई डॉक्टर तो कतई नहीं हो सकते।ड्ढr ड्ढr पत्रकारों पर हमले की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे बिहार राज्य नागरिक परिषद के महासचिव अनिल पाठक भी जूनियर डाक्टरों के इस रौद्ररूप को देखकर चकित थे। श्री पाठक ने जख्मी पत्रकारों को अस्पताल पहुंचाने में मदद की। ऐसा लग ही नहीं रहा था कि ये वहीं छात्र हैं जो मेडिकल की कड़ी परीक्षा पास कर डॉक्टर बनते हैं बल्कि ऐसा लग रहा था मानो ये सभी वाकई ‘रंजीत डॉन’ को खुश करके ही डाक्टर बन रहे हैं। उनकी ‘कैपिसिटी’ का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मरीजों के सैकड़ों परिजनों को वे सिर्फ अंगुली के इशार से खामोश कर सकते हैं। उनके एक इशार पर हॉकी स्टिक लिए उनके दर्जनों सहकर्मी तिमारदारों पर कहर बनकर टूटते हैं। पुलिस भी उनसे कांपती है। मरीजों की मृत्यु पर बदहवास परिजनों को ढाढ़स बंधाने की बजाय उनके साथ लप्पड़-थप्पड़ करना, बात-बात पर हड़ताल करना हाल के दिनों में उनके रूटीन का हिस्सा बन गया है। बुधवार की रात से जूनियर डॉक्टर इसलिए हड़ताल पर हैं कि उन्हें टाउन डीएसपी पसंद नहीं। उन्हें हटाने की जिद पर अड़े डॉक्टरों ने गुरुवार को जो उग्रता दिखाई उसे देखकर आम आदमी बीमार होने पर शायद ही अब पीएमसीएच जाने की हिम्मत जुटा पाए। वज्रवाहन आदेश की प्रतीक्षा करता रहाड्ढr पटना (हि.ब्यू.)। ‘का करं, बिना एसडीओ के लिखित आर्डर के हम कुछ नहीं कर सकते हैं। जाइये पहले लिखित आर्डर लेकर आइये।’ गुरुवार को पीएमसीएच के इमरजेंसी एवं डाक्टर हॉस्टल से हथियार और असलहे ले जूनियर डाक्टर मरीजों के निरीह परिजनों और पत्रकारों को पीटते रहे और वज्रवाहन एसडीओ के आदेश की प्रतीक्षा करता रहा। पटना के सीनियर एसपी अमित कुमार को फोन किया जाता रहा पर सिर्फ कार्रवाई के आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिला।ड्ढr हर बार सीनियर एसपी के फोन (037514) पर यही कहा जाता रहा कि मोबाइल वाहनों को वहां भेजा जा रहा है और पुलिस पहुंच रही है। पर पीएमसीएच परिसर के अन्दर पहुंचे एकाध पुलिस जवानों की घिग्घी बंधी रही।ड्ढr डाक्टर मरीजों के परिजनों और पत्रकारों को खदेड॥कर पीटते रहे और पुलिस जिप्सी उनके साथ चलती रही। न तो हमलावर डाक्टरों को रोकने की कोशिश की गई और न ही उन्हें पत्रकारों को पीटने से रोका गया। बाद में पीएमसीएच मुख्य द्वार के बाहर दर्जनों पुलिस गाड़ियां पहुंची पर किसी ने अन्दर जाने की हिम्मत नहीं दिखायी।ड्ढr और तो और, डाक्टरों के खदेड़ने पर पुलिस की गाड़ियां भी गांधी मैदान की तरफ भागती नजर आयी। यही नहीं पटना सदर एसडीओ समेत जिला प्रशासन के कई दंडाधिकारी पीएमसीएच के गेट पर खड़ा हो लोगों को समझाते रहे। पर उनलोगों ने भी जूनियर डाक्टरों की गुंडागर्दी को रोकने की गंभीर कोशिश नहीं की। मुंह बन्द कर सिर्फ मामला शांत हो जाने का इंतजार करते रहे।

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