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समस्या का समाधान हिंसा से संभव नहीं

भूख, प्यास और बेबसी से जुड़ी किसी भी समस्या का समाधान हिंसा और आतंक के जरिए संभव नहीं है। यह अपने-आप में एक समस्या है और यह समाधान नहीं हो सकता। बिहार-झारखंड के प्रमुख सम्पूर्ण क्रांतिनेताओं की हुई बैठक में आज राज्य में चल रहे आंदोलनों की समीक्षा की गई और इसे अंजाम तक पहुंचाने का संकल्प दुहराया गया। अध्यक्षता प्रमुख सवरेदय नेता त्रिपुरारि शरण ने की।ड्ढr ड्ढr बैठक कों संबोधित करते हुए श्री शरण ने कहा कि पूर देश के सूरते-हाल में बड़ा फर्क आया है। राजनैतिक नेतृत्व की विश्वसनीयता घटी है। ऐसे में हिंसा और आतंक से समाज और सत्ता बदलने वालों को विस्तार मिला है। समय रहते संपूर्ण-क्रांति धारा से जुड़े लोगों को राज्यव्यापी भूमिका अदा करनी होगी नहीं तो बिहार-झारखंड का शान्तिमय समाज बिखर जाएगा। वाहिनी के पूर्व संयोजक अरुण दास ने कहा कि हिंसा-आतंक के सहार काम करने वाले आज समाज में प्रभावी भले ही दिख रहे हों किंतु उन्हें भी इसकी समीक्षा करनी चाहिए कि उससे गरीबों को मिला क्या? वाहिनी के शांतिमय संघर्ष ने बोधगया के दस हजार भूमिहीनों को मठ की जमीन पर कब्जा दिला कर इतिहास रच दिया। बगहा में दस्यु-सरगनाओं के कब्जे से मुक्त कराकर गरीब पर्चाधारियों को जमीन दिलाने का एलान किया था और उसे आज पूरा कर दिखा दिया कि ‘ न मारंगे और न मानेंगे’ के शांतिमय नारों में कितनी ताकत है। संपूर्ण-क्रांति मित्रमिलन संयोजन समिति के संयोजक अरविंद ने कहा कि देश में संपूर्ण-क्रांति की धारा अवरुद्ध नहीं हुई है। इस फोरम में इस धारा के सौ से अधिक समूहों की ताकत उभर कर सामने आयी है।ड्ढr गरीब पर्चाधारियों को जमीन पर दखल दिलाना हो या जल-जंगल और जमीन के सवाल से लेकर महिला शक्ित-संवर्धन,बालमजदूर तथा पर्यावरण संरक्षण के सवाल पर संपूर्ण-क्रांति धारा के लोग आगे बढ़ कर संघर्ष करते रहे हैं। 30 दिसम्बर से 1 जनवरी को वाहिनी के पुराने साथियों का चेन्नई में हुआ राष्ट्रीय-जमघट ने यह साबित कर दिया कि राष्ट्रीय स्तर पर यह धारा आज भी अटूट है।

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  • Web Title: समस्या का समाधान हिंसा से संभव नहीं