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बुश ने झूठ का सहारा लिया : सीनेट समिति

अमेरिका के राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश और उनके प्रशासन के शीर्ष नीति निर्माताआें ने इराक पर हमला करने के लिए सद्दाम हुसैन और आतंकवाद के रिश्तों को बढ़ा चढ़ाकर पेश किया तथा इराक के हथियार कार्यक्रम के बारे में खुफिया एजेंसियों की शंकाओं को नजरंदाज किया। अमेरिकी संसद कांग्रेस के ऊपरी सदन सीनेट की खुफिया मामलों की समिति की गुरूवार को जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इराक और अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी संगठन अल कायदा के रिश्तों के बारे में बुश प्रशासन के बयान का कोई खुफिया आधार नहीं था। रिपोर्ट के अनुसार मार्च 2003 में अमेरिका की अगुवाई में इराक पर हुए हमले से पहले बुश प्रशासन के अधिकांश बयानों को सच साबित करने के लिए खुफिया जानकारी तो उपलब्ध हैं, लेकिन ये बयान यह समझाने में नाकाम रहे कि खुफिया रिपोटर्ों पर कोई आंतरिक चर्चा हुई थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि बुश प्रशासन ने इराक पर हमले का मुख्य कारण उसके पास जनसंहारक हथियार होना बताया था जो कि एकदम अनुचित और दोषपूर्ण था। समिति के अध्यक्ष जान राकफेलर ने रिपोर्ट पर अपनी लिखित टिप्पणी में कहा कि 11 सितंबर 2001 को अमेरिका पर हुए आतंकवादी हमले के बाद राष्ट्रपति और उनके सलाहकारों ने एक व्यापक जन अभियान चलाया, जिसमें सद्दाम हुसैन को अपदस्थ करने के लिए अल कायदा के खिलाफ चलाए जा रहे युद्ध का सहारा लिया गया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी जनता को यह कहकर गुमराह किया गया कि सद्दाम हुसैन और आतंकवाद के बीच रिश्ते हैं तथा यह गठजोड़ अमेरिका के लिए गंभीर खतरा है। झूठा बहाना बनाकर देश को युद्ध की आग में झोंका गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि तत्कालीन रक्षा मंत्री डोनाल्ड रम्सफील्ड के इस बयान का कोई खुफिया आधार नहीं था कि इराक सरकार ने जनसंहारक हथियारों को भूमिगत ठिकानों पर जमा कर रखा है।

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