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भारत और चीन के बीच सीमा बाधा नहीं

भारत और चीन ने इस बात के पुख्ता संकेत दिए हैं कि उन्होंने सीमा और वास्तविक नियंत्रण रेखा से जुड़े मसलों को विशेष प्रतिनिधि स्तर की व्यवस्था पर छोड़कर बाकी मामलों में तेजी से कदम बढ़ाने का निश्चय किया है। विदेशमंत्री प्रणब मुखर्जी की चार दिन की चीन यात्रा के दूसरे चरण में चीनी विदेशमंत्री यांग चिएची के साथ उनकी लंबी बातचीत से यह बात उभरकर सामने आई। अक्सर ऐसी शीर्ष स्तर की मुलाकातों में सीमा और उसके अतिक्रमण का मसला छाया रहता था। लेकिन इस बार दोनों पक्षों ने गर्मजोशी के साथ दूसरे मुद्दों पर ही बातचीत की और सीमा मसले का जब भी जिक्र आया उसे विशेष प्रतिनिधि स्तर की वार्ता पर छोड़ने की सहमति हुई।ड्ढr मुखर्जी और यांग गुरुवार देर रात तक बातचीत में मग्न रहे। उनकी यह बातचीत दोपहर बाद करीब चार बजे शुरु हुई थी, जो प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता से आगे बढ़ते हुए कार में साथ-साथ बात करने और फिर फोरबिडन सिटी में आयोजित रात्रि भोज के दौरान तक जारी रही। यांग ने भारतीय विदेशमंत्री के लिए ऐसे अनेक दोस्ताना अंदाज दिखाए जो अभी तक देखने में नहीं आए थे। फोरबिडन सिटी में भोज करना इनमें सबसे असाधारण था जहां किसी विदेशी मेहमान को ले जाना चीन की आेर से सवर्ोच्च सम्मान के तौर पर देखा जाता है। विभिन्न मंचों में इससे पहले चार बार मिल चुके यांग और मुखर्जी की आपसी दोस्ती भी काफी घुलीमिली लगी और दोनों रिश्तों को हर दिशा में आगे बढ़ाते महसूस हुए। मुखर्जी का चीन के प्रधानमंत्री वेन जिया वाआे से भी मिलने का कार्यक्रम था जो सिचुआन में पैदा हुई आपात स्थिति की वजह से उनसे नहीं मिल पा रहे हैं। लेकिन इस बैठक के रद्द होने पर वेन ने निजी तौर पर गहरा खेद व्यक्त किया। उन्होंने एक लिखित संदेश भेजकर इसके लिए मुखर्जी से खेद जताया ताकि किसी कूटनीतिक अटलकबाजी की गुंजाइश नहीं रहे। दोनों देशों के नेतृत्व के बीच वार्ता का ब्यौरा देते हुए विदेश सचिव शिवशंकर मेनन ने कहा सभी मुद्दों पर रचनात्मक और आगे बढने की लालसा रखने की भावना से बातचीत हुई जिसमें उच्च स्तरीय मेलमिलाप की प्रक्रिया को तेज करने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। इनमें चीनी विदेशमंत्री की इस साल के अंत में भारत यात्रा के अलावा तय किया गया कि राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल अगले साल चीन की यात्रा पर आएंगी। विदेश सचिव ने कहा कि सीमा मसले पर दोनों पक्षों ने सकारात्मक रुख अपनाते हुए पूरी शांति और यथास्थिति बनाए रखने तथा किसी भी स्थिति में मौजूदा व्यवस्थाआें के माध्यम से हल निकालने की मंशा जाहिर की। उन्होंने विशेष प्रतिनिधियों के स्तर पर हो रही वार्ता पर संतोष जाहिर किया और उनकी बैठक बहुत जल्दी ही बुलाए जाने पर सहमति जताई। मेनन ने कहा कि रक्षा संबंधों में भी सहयोग बढ़ाने पर दोनों पक्षों के बीच सहमति बनी। इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए दोनों देशों की सेनाआें के बीच इस साल के अंत में भारत में सैन्य अभ्यास होगा और सशस्त्र बलों के उच्च अधिकारी एक दूसरे के देश की यात्रा करेंगे।

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