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मंहगाई से निबटने में जनता सहयोग करे

सुरसा की तरह तेजी से बढ़ती मंहगाई से निबटने में विफल मनमोहन सिंह सरकार ने अब जनता से सहयोग की गुहार की है। नजदीक आ रहे चुनाव और मंहगाई की दर 8.24 फीसदी पहुंच जाने से चिंतित केन्द्र सरकार का दावा है कि कीमतों पर नियंत्रण के अनेक उपाय किये जा रहे हैं लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि से उत्पन्न समस्या के बार में जनता को भी समझना चाहिए। संसद में आम आदमी के हितों की रक्षा के लिये कभी ‘मैं हूं न’ का संवाद बोलने वाले वित्त मंत्री पी. चिदम्बरम ने शुक्रवार को मंहगाई और कीमतों में वृद्धि से उत्पन्न स्थिति से निबटने के बार में विस्तृत बयान जारी किया। इस बयान में वित्त मंत्री ने दावा किया कि दुनिया के किसी भी मुल्क की सरकार की तरह ही भारत सरकार भी मंहगाई की समस्या से जूझ रही है। हमने वित्तीय, आर्थिक तथा प्रशासनिक उपाय किये हैं और इस दिशा में अभी और कदम उठाये जाएंगे। मनमोहन सिंह सरकार की आर्थिक नीतियों की आलोचना करते हुये भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में पारित प्रस्ताव को वित्त मंत्री ने सिर से खारिा कर दिया। श्री चिदम्बरम का तर्क है कि मौजूदा मंहगाई के कारणों की जड़ तक पहुंचे बगैर ही मंहगाई के लिये सरकार की आलोचना करना बेमानी है। मंहगाई को एक बड़ी चुनौती के रूप में स्वीकारते हुये उन्होंने कहा कि भाजपा नेतृत्व वाली राजग सरकार के समय भी यह एक समस्या थी और ऐसी स्थिति में भाजपा को कीमतों पर काबू पाने के सुझाव भी देने चाहिए। मंहगाई से निबटने के सरकार के उपायों का जिक्र करते हुये वित्त मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि जनता के सहयोग और आपसी सूझबुझ से मूल्य वृद्धि पर काबू पा लिया जायेगा। वित्त मंत्री ने कहा कि राजग के शासनकाल में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम 22 से 28 अमेरिकी डालर प्रति बैरल थे जबकि इस साल मार्च से मई के दौरान तेल की कीमत डालर से बढ़कर 130 डालर प्रति बैरल का आंकड़ा पार कर गईं।

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