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सूबे में गहराया पेयजल संकट:गरीबों के सूख रहे हलक, प्रशासन नाकारा

पेयजल संकट को लेकर आम आदमी की पीड़ा से प्रशासन और प्रतिनिधि किस हद तक उदासीन है यदि यह नजारा देखना है तो औरंगाबाद में देखा जा सकता है। एक ओर जहां जिले के नौ प्रखंडों में लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जिले में करोड़ों रुपए मुहैया होने के बावजूद इस सीजन में एक भी चापाकल नहीं लगाया जा सका और न ही खराब चापाकलों की मरम्मत ही की जा सकी। जिले की सभी 44 ग्रामीण पेयजलापूर्ति योजनाएं तथा शहरी जलापूर्ति योजनाएं भी वर्षो से ठप पड़ी है लेकिन इनकी सुध लेनेवाला भी कोई नहीं। नगर पर्षद क्षेत्र के कई मुहल्लों में पानी पांच रुपए प्रति बाल्टी बेंचा जा रहा है। नए चापाकल लगाने के लिए पर्षद के पास आए पैसे अब तक अनछुए पड़े हैं और एक भी चापाकल नहीं लगा। गया में खरीदने पर भी नहीं मिलता पानीड्ढr सतीश कुमार मिशड्र्ढr गया। जीवन का पानी से कितना गहरा रिश्ता है इसका जितना बढ़िया चित्रण गयावासी कर सकते हैं, दूसरों के लिए कठिन है। यहां का कोई ऐसा व्यक्ित नहीं है जिसे पानी से अधिक किसी चीज की चिंता हो। गर्मी का मौसम आने पर तो जलस्तर के खिसक जाने से अधिसंख्य चापाकल टांय बोल देते हैं। कुओं में पपड़ी पड़ जाती है। बिजली की लचर आपूर्ति से पंप भी नहीं चल पाते। नतीजा-पानी की भीषण किल्लत। खरीदने पर भी पानी नहीं जुट पाता। तंग आकर लोग स्कूलों की बंदी के बाद परिवार को घर या रिश्तेदारों के पास छोड़ आते हैं। परिवार तब आता है जब बारिश इस समस्या की भीषणता कम कर चुकी होती है। हालांकि इस वर्ष पानी की किल्लत दो वर्ष पूर्व की तरह नहीं है, फिर भी जलस्तर काफी खिसका है। नतीजा यह है कि जिले के बथानी, अतरी, इमामगंज, डुमरिया,कोंच, वजीरगंज इत्यादि प्रखंडों के चापाकल सूख गए हैं। पीएचईडी के कार्यपालक अभियंता ए के सिन्हा बताते हैं कि इसके लिए टेंडर तो हुआ है लेकिन तकनीकी अड़चन के कारण अभी तक कार्य आरंभ नहीं हुआ।ड्ढr ड्ढr बक्सर में बूंद-बूंद के लिए तरस रहे लोगड्ढr राकेश कुमार सिंहड्ढr बक्सर। गर्मी आते ही जिले के कई क्षेत्रों में लोगों को बूंद-बूंद पानी के लिए तरसना पड़ता है। स्थिति इतनी विकराल हो जाती है कि लोगों को मीलों पैदल चलकर पीने के पानी का जुगाड़ करना पड़ता है। इस बार गर्मी में भी ऐसी ही स्थिति होती जा रही है। वर्तमान में खासकर गरीब व मध्यम वर्गीय परिवारों को पानी के लिए छटपटाना पड़ रहा है। गरीब वर्ग के लोग शहर के पीएचईडी के द्वारा स्थापित नलों पर सुबह से ही अपने बर्तनों से नंबर लगा पानी टपकने का इंतजार करते हैं। पीएचईडी के पास ऐसी स्थिति से निबटने की कोई योजना जिले में नहीं है। विभाग यह मानता है कि बक्सर शहरी और कुछ प्रखंडों के इलाकों में जलस्तर तेजी से नीचे जा रहा है। बक्सर शहर की बात करं तो शहरवासियों के लिए जल संकट कई वर्षो से बदस्तूर जारी है। यहां जलस्तर काफी नीचे चला गया है। कोई चापाकल गड़वाने की सोचनहीं सकता।ं

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