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कचचच्चे तेल कचची कचचीमतें 139 डॉलर प्रति बैरल के पार

अमेरिकी डॉलर के टूटने तथा इजरायल और ईरान के बीच तनाव बढ़ने के समाचारों के बीच निवेशकों की जोरदार लिवाली से अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें शुक्रवार को नौ प्रतिशत बढ़कर 13डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गई। इससे पहले मंगलवार और बुधवार के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में एशियाई देशों की मांग घटने की आशंका के बीच गिरावट का रुख था और भाव सात डॉलर प्रति बैरल तक नीचे आ गए थे। शुक्रवार के कामकाज में यू एस क्रूड का दाम 13डॉलर प्रति बैरल तक चढ़ने के बाद समाप्ति पर 138.54 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। कच्चे तेल में डॉलर के रुप में एक दिन की यह अब तक सर्वाधिक बढ़त थी। गुरुवार को कच्चा तेल 5.4डॉलर प्रति बैरल बढ़ा था। लंदन ब्रेंट क्रूड का दाम 10.15 डॉलर बढ़कर 137.6डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। कामकाज के दौरान यह ऊंचे में 138.12 डॉलर प्रति बैरल तक बोला गया। निवेशक बैंक मोरग्न स्टैनले का मानना एशियाई देशों की जोरदार मांग से अमेरिका के लिए कच्चे तेल का लदान धीमा पड़ सकता है और इसके चलते दाम चार जुलाई तक 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकते हैं। बैंक ने अपने अनुसंधान नोट में कहा कि तेल की कीमतों में अल्पावधि लिहाज से बढ़ोत्तरी को रोका जाना चाहिए। इस साल कच्चे तेल की कीमतों में 44 फीसदी बढ़ोत्तरी हुई है, जिससे अमेरिका समेत विश्व की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को आर्थिक खतरा पैदा हो गया है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था पहले ही आवास संकट में बुरी तरह फंसी हुई है। विश्लेषकों का मानना है कि चीन और दूसरी उभरती अर्थव्यवस्थाओं में कच्चे तेल की बढ़ती मांग से इसके दामों में बढ़ोत्तरी हो रही है। इसके अलावा कमजोर पड़ रहे डॉलर के मुकाबले निवेशक बाजार में काफी पैसा लगा रहे हैं। दूसरा बड़ा कारण अमेरिका में पिछले पांच महीनों से बेतहाशा बढ़ती बेरोजगारी भी है और बेरोजगारी दर पिछले तीन वर्षो में अपने उच्च स्तर तक पहुंच गई है। डॉलर की कीमतें गत गुरुवार से उस समय गिरनी शुरु हो गई थी, जब यूरोपीय सेन्ट्रल बैंक के अध्यक्ष जीन क्लाउडे ट्रिशेट ने कहा था कि नीति निर्धारकों में अधिकांश अगले माह से ऊंची ब्याज दरों के पक्ष में है। विश्लेषकों के मुताबिक कमजोर हो रहे अमेरिकी डॉलर से अर्थव्यवस्थाओं को पहुंचने वाला नुकसान भी चिंता का विषय बना हुआ है। इस संकट को इजरायल के परिवहन मंत्री ने भी भड़काने का काम किया था, अब उन्होंने कहा कि ईरान के परमाणु संयंत्रों पर हमला अपरिहार्य हो गया है।

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