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ब्लैकबेरी विवाद ठंडे बस्ते में डालने की तैयारी

ब्लैकबेरी फोन को लेकर बीते काफी महीनों से चल रहे सुरक्षा संबंधी विवाद को ठंडे बस्ते में डालने की तैयारी चल रही है।संचार मंत्रालय और आईबी अब ब्लैकबेरी मोबाइल फोन बनाने वाली कनाडा की कंपनी आरआईएम पर दबाव नहीं बनाएगी कि वह ब्लैकबेरी से ब्लैकबेरी फोन पर आने-ााने वाले संदेशों को पढ़ने की टेकनोलॉजी सरकार को दे। संचार मंत्रालय के भरोसेमंद सूत्र दावा कर रहे हैं कि कनाडा सरकार की कूटनीतिक पहल के बाद ब्लैकबेरी फोन के भारत में भविष्य को लेकर छाए बादल छंटने लगे हैं। स्मरणीय है कि कनाडा के भारत में उच्चायुक्त डेविड एम.मेलोन ने संचार मंत्री ए. राजा तथा विदेश सचिव शिवशंकर मेनन के समक्ष आरआईएम का पक्ष रखा था और उन्हें भरोसा दिलाया कि किसी भी परिस्थति में ब्लैकबेरी से भारत विरोधी शक्ितयों को अपने मंसूबों को पूरा करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। मेलोन के इस वादे के बाद आरआईएम अमेरिका की दो साफ्टवेयर सोल्युशंस कंपनियों के प्रतिनिधियों को भी इधर लेकर आई। केन टेक्नोलॉजी और क्लीयरटेल के पेशेवरों ने भारतीय सुरक्षा एजेंसियों और संचार मंत्रालय के अधिकारियों के साथ अपनी बैठक में दिखाया कि किस प्रकार से संदेशों को पढ़ा जा सकता है। जानकारों का कहना है कि इन कोशिशों के बाद भारतीय पक्ष शांत हो गया है। अब संचार मंत्रालय तथा सुरक्षा एजेंसियां भी आरआईएम से बार-बार अलग-अलग तरह के सवाल नहीं पूछेगी। टेलीकॉम सचिव सिद्धार्थ बेहुरिया ने अपने एक हालिया पत्र में विदेश सचिव शिवशंकर मेनन को भरोसा दिलाया कि भारत में ब्लैकबेरी मोबाइल की सर्विस को रोका नहीं जाएगा।

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