DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

अपने ही घर में बेघर हो रहे हैं बुजुर्ग

दिल्ली के 52 प्रतिशत बुजुर्गो के साथ उनके बच्चे व बहुएं मारपीट व गाली गलौज तक करते हैं। वे बुजुर्गो को संपत्ति अपने नाम करवाने के लिए उन पर दबाव डालते हैं। यही नहीं, जब किसी बिल्डर या कंस्ट्रक्शन कंपनी की नजर बुजुर्गो की जायदाद पर पड़ती है, तो अक्सर कई मामलों में ये लोग नए हथकंडे अपनाकर उन्हें अपनी जायदाद कम कीमत पर बेचने के मजबूर करते हैं। पुलिस या तो तमाशबीन बनी रहती है या अक्सर इनसे मिलकर बुजुर्गो को मामला निपटाने के लिए कहती है। हेल्प एज इंडिया द्वारा किए गए सव्रे से यह भी सामने आया है कि संपत्ति के मामले में सबसे ज्यादा बुजुर्गो का उत्पीड़न राजधानी के बसंत विहार, ग्रेटर कैलाश, गुलमोहर पार्क, चित्तरांन पार्क, फ्रैन्ड्स कालोनी, हौाखास, ग्रीन पार्क, लाजपत नगर, डिफेंस कालोनी जसे पॉश इलाकों में होता है। दक्षिण दिल्ली के इलाकों में करीब 42 प्रतिशत बुजुर्ग उत्पीड़न के शिकार हैं। इन इलाकों के बेटे व बेटियां अपनी शानदार लाइफ स्टाइल के लिए बुजुर्गो से लगातार पैसों की मांग करती हैं। बुढ़ापे में बच्चों पर निर्भर होने के कारण लोग उनकी मांगों को ठुकारने में असमर्थ रहते हैं। उत्पीड़न के शिकार बुजुर्गो में 4प्रतिशत पुरुष तथा 28 प्रतिशत महिलाएं हैं। सव्रे के अनुसार उत्पीड़न के शिकार 44 प्रतिशत बुजुर्गो ने अपने उत्पीड़न की शिकायत पुलिस से की। शेष बुजुर्गो ने पुलिस व कानून पद्धति पर विश्वास न होने, बच्चों के साथ भावनात्मक जुड़ाव व परिवार की इज्जत आदि के कारण शिकायत नहीं की। मारपीट के अलावा बुजुर्गो के उत्पीड़न में और भी कई तरीके अपनाए जाते हैं। मसलन, उन्हें मित्रों, रिश्तेदारों से अलग-थलग कर दिया जाता है। अगर उनसे मिलना चाहें तो कह दिया जाता है कि वे बोल नहीं सकते। बुजुर्गो को पोते-पोतियों से मिलने नहीं दिया जाता। बुजुर्गो को बाहर निकल कर उनकी आयु के लोगों से मिलने-ाुलने या घूमने नहीं दिया जाता।ंं

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: अपने ही घर में बेघर हो रहे हैं बुजुर्ग