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राजधानी के लोग घंटों करते हैं इंतजार

ढाई करोड़ की लागत से बना विद्युत शवदाह गृह पिछले चार माह से अनुपयोगी पड़ा है। आरआरडीए ने इसका निर्माण फरवरी में ही पूरा कर लिया है। इसकी सूचना नगर विकास को देते हुए इसे नगर निगम को स्थानांतरित करने को कहा गया था। विभाग की ओर से इसे नगर निगम को स्थानांतरित भी कर दिया गया। बावजूद इसके इसका लाभ राजधानी के लोगों को नहीं मिल रहा है।ड्ढr नगर निगम और आरआरडीए के बीच की गलत फहमी के कारण इससे एक तो सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा है। दूसरा हर माह बिजली बिल मद में भी बोझ बढ़ता चला जा रहा है।ड्ढr झारखंड हाईकोर्ट ने नगर विकास विभाग को 30 दिसंबर 2007 तक विद्युत शवदाह गृह को चालू करने का निर्देश दिया था। फिर भी शवदाह गृह का निर्माण पूरा नहीं हो सका। आरआरडीए उपाध्यक्ष के प्रयास से फरवरी में इसका निर्माण पूरा हुआ। विभाग की ओर से इसे नगर निगम को स्थानांतरित कर दिया गया है, फिर भा चालू किया जा रहा है।ड्ढr आरआरडीए ने बनाकर दे दिया है : सचिवड्ढr प्राधिकार के सचिव एसएन मंदिलवार का कहना है कि 31 जनवरी तक विद्युत शवदाह गृह को हर हाल में चालू कर लेना था। फरवरी में निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया। इसकी सूचना विभाग को दे दी गयी है। चलाना नगर निगम को , जब शुरू करं। चाबी संवेदक के पास है। नगर निगम के अधिकारी इसे लेकर चालू करं। आरआरडीए को निर्माण करना था सो कर दिया।ड्ढr ऐसे थोड़े हैंडओवर दिया जाता है : डिप्टी सीइओड्ढr रांची नगर निगम के डिप्टी सीइओ मुकेश कुमार वर्मा ने कहा कि कागज पर थोड़े न हैंडओवर होता है। नगर विकास विभाग से चिट्ठी मिलने का मतलब हैंडओवर हो गया, ऐसा नहीं होता है। इसे लेने से पूर्व देखना होगा कि चालू हालत में है भी या नहीं। इसे तो संबंधित अभियंता को चाहिए था कि सूचि बनाकर सामानों के साथ नगर निगम को सौंपे।

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