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प्रचंड गर्मी से जलस्तर नीचे खिसका, पेयजल के लिए हाहाकार

गर्मी से गला सूख रहा हो और पानी की किल्लत हो। अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है कि प्यासों पर क्या गुजर रही होगी। गर्मी के परवान चढ़ते ही जिले के कई प्रखंडों में भूगर्भ जलस्तर कम हो जाता है। लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग इसे भले ही बढ़ती गर्मी का नकारात्मक प्रभाव मान जलस्तर बढ़ने के लिए बरसात का इंतजार कर लेकिन वैशाली जिले के कई गांवों के लोग शुद्ध पेयजल के लिए खाक छानते नजर आ रहे हैं। ढाई सौ की आबादी पर एक चापाकल की सरकारी योजना भी अमली जामा नहीं पहन सकी है। पीएचईडी द्वारा जिले के विभिन्न क्षेत्रों में अब तक 22 हाार चापाकल गाड़े गए। लेकिन उनमें से 7 हाार चापाकल वैसे है जो भूगर्भ जलस्तर के नीचे जाने के कारण बंद हो गए। ग्रामीणों का भी यही मानना है। जबकि इसके विपरीत पीएचईडी का कहना है कि संरचना परिवर्तन व विशेष मरम्मती के अभाव में चापाकलों की यह दुर्गति हुई है।ड्ढr ड्ढr जिले में जलस्तर घटने की बात स्वीकारते हुए पीएचईडी के कार्यपालक अभियंता के एल बैठा ने बताया कि चेहराकला, जंदाहा एवं पातेपुर से भूगर्भ जलस्तर घटने की सूचना मिली थी। जांच के लिए गई टीम ने भी सूचना में सत्यता पाई। श्री बैठा ने कहा कि इन जगहों पर डेढ़ से दो फीट तक जलस्तर में कमी जरूर पायी गई है लेकिन इसके पीछे उन्होंने गर्मी का बढ़ता प्रभाव बताया। जिले में दर्जनों गांव ऐसे भी हैं जहां लोग अभी तक कुएं के पानी पर ही आश्रित हैं। जिले में 1223 ऐसे टोले हैं जिन्हें अनाच्छादित टोले की श्रेणी में रखा गया है। ऐसे टोलों में अधिकतर अनुसूचित जाति व जनजाति के लोग निवास करते हैं जबकि 1423 टोले ऐसे हैं जो आंशिक रुप से आच्छादित हैं। आश्चर्य की बात तो यह कि पूर जिले में महा 402 टोले ही ऐसे हैं, जो पेयजल के मामले में पूर्ण आच्छादित हैं। उक्त आंकड़े 2001 की जनगणना के हैं। सूख रहे हैं ताल-तलैये, जलापूर्ति योजना हुई विफल डा.शैलेन्द्र कुमार झाड्ढr मधुबनी । जिले में जलस्तर के नीचे चले जाने से पेयजल के लिए हाहाकार की स्थिति देखी जा रही है। चापाकल सूख रहे हैं। ग्रामीण जलापूर्ति योजना ठप है। तालाबों एवं ताल-तलैयों में पानी काफी नीचे चला गया है। सारी सरकारी कवायद व योजनाएं आम जनता को पेयजल मुहैया कराने में विफल हो रही है। एक तरफ जिले के आम लोग पेयजल के लिए तरसती निगाहों से देखने को अभिशप्त हैं तो दूसरी तरफ किसानों को अपनी फसल बोने के लिए खुले आकाश की ओर मुखापेक्षी होना पड़ रहा है। रहिका प्रखण्ड का मुसहरी टोल हो व हरलाखी का विशौल गांव स्थित दलित बस्ती व जिला मुख्यालय स्थित समाहरणालय का इलाका। सब जगह एक सी स्थिति है। जिला के पीएचडी कार्यालय की संचिकाओं के आंकड़े बताते हैं कि जिले के विभाग द्वारा अब तक 33 हाार चापाकल गाड़े जा चुके है। जिनमें से तकरीबन 10 हाार चापाकल का जलस्तर नीचे चले जाने के कारण पानी आना बंद हो गया है। एक गैर सरकारी संस्था की सव्रेक्षण रिपोर्ट बताती है कि जिले के अधिकांश चापाकल सूख चुके हैं। केवल निजी स्तर पर गाड़े गए चापाकल से ही पेयजल की आपूर्ति हो पाती है। यही हाल जिले में लगायी गयी जलापूर्ति योजना के तहत बिछाए गए नलकों की है। कुछ तो पहले ही पीएचईडी विभाग की लापरवाही के चलते काम करना बंद कर चुके थे। बाकी बचे नलकूपों के गले को भीषण गर्मी ने सुखा दिया है। विभागीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने व्याप्त भारी पेयजल संकट से उबरने के लिए तत्काल पेयजल आपूर्ति योजनाओं को चालू करने का निर्देश भी विभागीय कार्यपालक अभियंता को दिया है।ड्ढr जल भंडार है पर बुझती नहीं प्यासड्ढr विजय कुमार वर्माड्ढr सीतामढ़ी। ‘पानी बीच मीन प्यासी, मोहि सुनी-सुनी आवत हांसी’ कबीरदास के दोहे के इन पंक्तियों से अलग नहीं है सीतामढ़ी जिले की स्थिति। हर साल नदियों के उफान से भले ही जिले के लोग डूबते-उतराते हैं, लेकिन शुद्ध पेयजल हर गांव को मयस्सर नहीं। प्राकृतिक संपदा के रूप में जिले में पानी का पर्याप्त भंडार तो है। लेकिन भूगर्भ में जमा इस अनमोल वस्तु को होठों तक पहुंचाने की कवायद में जिला अब भी फिसड्डी है। पेयजल के लिए सरकारी चापाकलों की स्थिति व संख्या इतनी है कि इससे जिलेवासियों की प्यास नहीं बुझ सकती। इसी कारण ग्रामीण क्षेत्रों में गरीब तबके के लोग कम गहराई पर लगे चापाकल का पानी-पीने को मजबूर हैं। जिससे उनकी जरूरतें तो पूरी होती हैं लेकिन धीमा जहर उनके शरीर में प्रवेश करता रहता है। ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबों को शुद्ध पेयजल भी मयस्सर नहीं है। पीएचईडी द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार राज्य योजना के तहत वर्ष 2006-07 में जिले भर में एनसी, पीसी टोला में 342 तथा पुराने बंद चापाकल के स्थान पर नए चापाकलों के निर्माण की प्रक्रिया अब तक जारी है। जबकि वर्ष 07-08 के लिए एनसी, पीसी टोला में 1010 चापाकल लगाने एवं पेयजल विहीन जिले के 61 प्राइमरी एवं मिडिल स्कूलों में चापाकल लगाने की प्रक्रिया कागजी दौर में है। इसी प्रकार केन्द्र प्रायोजित त्वरित ग्रामीण जलापूर्ति कार्यक्रम अंतर्गत चापाकलों के निर्माण का कुल लक्ष्य 1507 के विरुद्ध उपलब्धि अब तक मात्र 274 है। जिले में पीएचईडी द्वारा पानी टंकी से पेयजल आपूर्ति की जाती है। जिसमें सीतामढ़ी शहरी क्षेत्रों में दो, डुमरा में एक के अलावा पुपरी, बेलसंड, रून्नीसैदपुर, बैरगनिया नगर क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति होती है जबकि केन्द्र प्रायोजित त्वरित ग्रामीण जलापूर्ति योजना के तहत बथनाहा, सोनबरसा, रीगा 1 पुनर्गठन ग्रामीण जलापूर्ति योजना के तहत निर्माण जारी है।

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