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बंटवारे के पक्ष में नहीं थे मुसलमान : अंसारी

उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने कहा है कि अधिकतर मुसलमानों ने वर्ष 1में हुए देश के बंटवारे का विरोध किया था क्योंकि वे इसके बाद होने वाली परेशानियों और पड़ने वाले प्रभावों से अच्छी तरह से परीचित थे। अंसारी ने नागरिक अधिकारों के लिए संघर्षरत जानेमाने सामाजिक कार्यकर्ता बलराज पुरी की पुस्तक ‘मुस्लिम ऑफ इंडिया सिंस पार्टिशन’ का शनिवार को विमोचन करने के बाद कहा कि बंटवारे के बाद भी कई मुसलमान बुद्धिजीवियों ने पाकिस्तान जाने से इनकार कर दिया था क्योंकि उन्होंने मोहम्मद अली जिन्ना की मुसलमानों के लिए अलग देश बनाने की नीति का कभी समर्थन नहीं किया था। जिन्ना द्वारा पाकिस्तान में उनके पिता को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दिए जाने क े प्रस्ताव के बारे में अंसारी ने कहा कि उन्होंने उस प्रस्ताव को अस्वीकार कर भारत में ही रहकर गरीबों और निचले तबके के लोगों के विकास के लिए काम करने का निर्णय किया। उन्होंने कहा कि मेरे पिता के विचार देश के उन अधिकतर मुसलमानों की भावनाआें का प्रतिनिधित्व करते थे, जिन्होंने पाकिस्तान के बजाय भारत को ही अपना देश माना। उन्होंने कहा कि सरकार मुसलमानों का आर्थिक और शैक्षिक पिछड़ापन दूर करने के लिए सच्चर समिति की सिफारिशों को लागू करने को प्रतिबद्ध है। भारतीय संविधान सभी नागरिकों को समान अवसर प्रदान करता है इसलिए पिछड़े और दबे चले लोगों की आर्थिक समृद्धि के लिए कार्यक्रम बनाना जरूरी है।

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