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‘तुगलकी फरमान से लोग हलकान’ शीर्षक से प्रकाशित समाचार, दैनिक हिन्दुस्तान, 06 जनवरी के अंक में, उपरायपाल तेजेन्द्र खन्ना का यह बयान पढ़कर बड़ा दुख व अचरज हुआ कि- ‘अन्य रायों में ड्राइविंग लाइसेंस बनाने में हेराफेरी होती है।’ खन्ना का यह बयान उतना ही दुखी करने वाला है, जितना शिवसेना के कार्यकारी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे का वह बयान, जो उन्होंने नववर्ष की शुरुआत में मुंबई में दो प्रवासी महिलाओं से छेडख़ानी करने वालों की तरफदारी में दिया है। खन्ना जी, कौन नहीं जानता कि आज दिल्ली में न केवल ड्राइविंग लाइसेंस, बल्कि राशन कार्ड और पहचान पत्र तक बनाने में बड़े स्तर पर हेराफेरी होती है। खूब रिश्वतखोरी चलती है। दिल्ली का कोई भी सरकारी विभाग दूध का धुला तथा रिश्वतखोरी व हेराफेरी से रहित नहीं है। फिर, दिल्ली के ड्राइविंग लाइसेंस विभाग को आप कैसे और किस आधार पर तारीफ के काबिल मान रहे हैं?ड्ढr बी. एस. डोगरा, सीमापुरीड्ढr वापस बुलाने का अधिकार होड्ढr सोमनाथ चटर्जी सबसे अधिक बार सांसद चुनकर संसद पहुंचे हैं। इस समय भी वह लोकसभा अध्यक्ष के रूप में सांसद हैं। अपनी तेज-तर्रार छवि के कारण वह हमेशा चर्चा में रहते हैं। हाल ही में उन्होंने बयान दिया है कि जनता वोट की लाइन में लगकर अपने प्रतिनिधि को चुनती है। प्रतिनिधि अगर गलत है तो उसे पांच साल से पहले ही वापस बुलाने का हक भी जनता को मिलना चाहिए।ड्ढr वह अपनी इसी बात को पहले भी दोहरा चुके हैं, लेकिन वह कभी अध्यादेश का रूप नहीं ले सकी। देश की राजनीति में सुधार की और भी बातें उठीं, जैसे मतदान अनिवार्य कर दिया जाए। जनता किसी को वोट नहीं देना चाहती तो इनमें से एक विकल्प ‘इनमें से कोई नहीं’ मिले। कई प्रतिनिधियों को लहर में चुन लिया जाता है। इसलिए अयोग्य प्रतिनिधि की वापसी का अध्यादेश जारी होना चाहिए। कई प्रतिनिधियों को लहर में चुन लिया जाता है। इसलिए अयोग्य प्रतिनिधि की वापसी का अध्यादेश जारी होना चाहिए। कई प्रतिनिधियों को लहर में चुन लिया जाता है। इसलिए अयोग्य प्रतिनिधि की वापसी का अध्यादेश जारी होना चाहिए।ड्ढr दिलीप कुमार गुप्ता, बरेलीड्ढr भक्तों में भेदभाव ठीक नहींड्ढr गत 6 जनवरी, 2008 को स्पोर्ट्स क्लब, साकेत में शाम लगभग पौने आठ बजे से ग्यारह बजे तक मशहूर पाश्र्वगायक मनहर उधास द्वारा गाए श्री साईं बाबा के भजनों से हर शाम जनमानस को ऐसा लगा मानो वह स्वयं शिरडी के साईंधाम या देवलोक में विचरण कर रहा हो।ड्ढr नएवर्ष के मौके पर ऐसे धार्मिक आनंददायक कार्यक्रम के लिए इसके आयोजक धन्यवाद के पात्र हैं, लेकिन इस कार्यक्रम का एक दुखद पहलू यह रहा कि कड़ाके की ठंड में साईं के भजनों के श्रोताओं के बैठने के लिए ठीक से इंतजाम नहीं किया गया था, जबकि प्रशासनिक अधिकारियों, नेताओं और अन्य पासधारकों के लिए विशेष इंतजाम किए गए। आयोजकों को चाहिए था कि श्रोताओं में पक्षपात न करके सबको बराबरी का दर्जा दिया जाना चाहिए था। आखिर भगवान के सामने छोटे-बड़े का भेद कैलए इसके आयोजक धन्यवाद के पात्र हैं, लेकिन इस कार्यक्रम का एक दुखद पहलू यह रहा कि कड़ाके की ठंड में साईं के भजनों के श्रोताओं के बैठने के लिए ठीक से इंतजाम नहीं किया गया था, जबकि प्रशासनिक अधिकारियों, नेताओं और अन्य पासधारकों के लिए विशेष इंतजाम किए गए। आयोजकों को चाहिए था कि श्रोताओं में पक्षपात न करके सबको बराबरी का दर्जा दिया जाना चाहिए था। आखिर भगवान के सामने छोटे-बड़े का भेद कैसा?

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