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शेयरों में उठापटकचच बनी रहने कचची संभावना

च्चे तेल के उबाल और मंहगाई की मार से दबे शेयर बाजारों में आगामी सप्ताह भी उठापटक बने रहने की अधिक संभावना है। बीते सप्ताह चौतरफा बिकवाली का जोर रहने से बीएसई का सेंसेक्स 843.3अंक अर्थात 6.07 प्रतिशत तथा एनएसई के निफ्टी ने 242.3 अंक करीब पांच प्रतिशत का गोता लगाया। विशेलषकों का कहना है कि फिलहाल जो स्थिति है उसे देखते हुए शेयर बाजारों में सुधार की गुंजाइश नजर नहीं आ रही है। दिल्ली शेयर बाजार के पूर्व अध्यक्ष और ग्लोब कैपीटल मार्केट्स लिमिटेड के प्रमुख अशोक अग्रवाल का कहना है कि पहले ही आठ प्रतिशत से ऊपर चल रही महंगाई की दर पर पैट्रोल और डीजल की कीमतों में बढोत्तरी का असर आना बाकी है। विशलेषक पहले ही मान रहे हैं कि यह नौ प्रतिशत से ऊपर निकल जाएगी। उनका मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोत्तरी शेयर बाजार के अनुकूल नहीं है। सरकार ने सार्वजनिक तेल कंपनियों को हो रहे नुकसान की भरपाई के लिए पैट्रोल और डीजल के दामों में क्रमश: पांच तथा तीन रुपए और रसोई गैस के प्रति सिलेंडर की कीमत पचास रुपए बढ़ाई है। उधर शुक्रवार का दिन अमेरिकी शेयर बाजारों के लिए बहुत खराब रहा। अमेरिका में मई माह में नौकरियों के अवसरों में प्रतिशत के लिहाज से पिछले 22 वर्ष की सर्वाधिक साढ़े पांच प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और कच्चे तेल के दाम 13डॉलर प्रति बैरल को पार कर गए। इन खबरों के बीच डाऊ जोंस सूचकांक में पिछले डेढ़ वर्ष के दौरान एक दिन की सर्वाधिक गिरावट करीब तीन प्रतिशत दर्ज की गई।ड्ढr पांच जून को समाप्त हुए सप्ताह में बीएसई सेंसेक्स 843.3अंक के नुकसान से 15572.18 अंक तथा निफ्टी 242.30 अंक की गिरावट से 4627.80 अंक रह गया। सप्ताह के दौरान बीएसई के मिडकैप को 6350.15 अंक पर 410.3अर्थात 6.07 प्रतिशत का झटका लगा। स्मालकैप 5.37 प्रतिशत अथवा 437 अंक के नुकसान से 7605 अंक रह गया। वैसे श्री अग्रवाल का मानना है कि दीर्घकालिक लिहाज से बाजार में मजबूती की संभावनाओं में कोई कमी नहीं आई है।ड्ढr बीते सप्ताह सेंसेक्स से जुड़ी कई बड़ी कंपनियों के शेयरों में जोरदार गिरावट रही। भेल का शेयर करीब 15 प्रतिशत टूट गया। रियलटी क्षेत्र की अग्रणी कंपनी डीएलएफ लिमिटेड का शेयर तो अपने इश्यू प्राइस 525 रुपए के मुकाबले घटकर 518 रुपए के आसपास रह गया। सेंसेक्स में सर्वाधिक भारांक रखने वाले रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर को 223पए पर 6.76 प्रतिशत का झटका लगा। निजी क्षेत्र के अग्रणी आईसीआईसीआई बैंक के शेयर में 770.85 रुपए पर 2.21 प्रतिशत का घाटा हुआ।ड्ढr पिछले साल देश के शेयर बाजारों में रिकार्ड उछाल के लिए विदेशी संस्थानों की सक्रियता मुख्य रूप से सहायक थी। इन्होंने 17 अरब 40 करोड़ डॉलर का निवेश भारतीय शेयर बाजारों में किया था, किंतु इस वर्ष अब तक यह करीब साढ़े चार अरब डॉलर की निकासी कर चुके हैं। जून माह के दौरान विदेशी संस्थान अब तक 32रोड़ 20 लाख रुपए की शुद्ध बिकवाली की है। घरेलू संस्थानों ने भी पांच जून को समाप्त सप्ताह के दौरान 144 करोड़ 20 लाख रुपए की निकासी की।

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