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बिहार-यूपी की हरियाली पर खतरा

यूं तो नेपाल के भीतरी इलाकों में माओवादी आंदोलन काफी समय से चल रहा है। पर धीरे धीर इसका असर सीमावर्ती इलाकों तक पहुंच गया है। इस तरह के आंदोलन का व्यापक असर चम्पारण, गोपालगंज, हाजीपुर समेत यूपी के किसानों पर अब साफ दिखने लगा है। यही वजह है कि गंडक नदी के कटाव से क्षतिग्रस्त बांधों की मरम्मत को ले नेपाल के किसान गंडक बराज से निकलने वाली पश्चिमी मुख्य नहर की तलहटी में धरना पर बैठ आंदोलनरत हैं।ड्ढr ड्ढr इनका आंदोलन पानी की मार से बचाव के लिए है जबकि इस आंदोलन के चलते बिहार-यूपी के किसानों को पानी नहीं मिल रहा और खेतों की हरियाली लगभग समाप्त होने को है। इतना ही नहीं नहरो के बंद होने से दो पनबिजली घरों में बिजली उत्पादन ठप पड़ा है। इस संबंध में बराज के अधीक्षण अभियंता आरपी रांन ने कहा कि नहरों में पानी छोड़ने के लिए बराज में पाउंडिंग (पानी जमा करना) होता है। पर, नेपाल के आंदोलनरत किसान पाउंडिंग नही होने दे रहे हैं। आंदोलनकारियों ने पाउंडिग नहीं करने के लिए धमकी दी है। आंदोलनकारी मुख्य पश्चिमी नहर की तलहटी में बैठ धरना दे रहे हैं।ड्ढr ड्ढr श्री रांन ने यह भी कहा कि पाउडिंग से पहले पूर्वी और पश्चिमी मुख्य नहरों समेत बराज के सभी गेटो ं की जांच की जाती है। लेकिन पश्चिमी मुख्य नहर के गेटों की जांच आंदोलनकारियों ने नहीं करने दी। इस कारण पाउडिंग नही हो पा रहा है और नहरो में पानी नहीं छोड़ा जा रहा है। नहरों में पानी नहीं छूटने से बिहार व यूपी के किसान परशान हैं। नहरो में पानी आने की उम्मीद में किसानो ने पंप सेट से धान के बीज तो गिरा लिए। लेकिन अब बिचड़ों की रोपनी के लिए नहरों से पानी नही मिल पा रहा है। डीाल महंगी होने से पंपसेट से पटवन कराना अब किसानों की बूते से बाहर की बात हो गयी है। दूसरी तरफ नहरों में पानी नहीं छूटने से नेपाल स्थित सूर्यपुरा पनबिजली घर और बिहार के कोतरांहा बिजली घर में पानी के अभाव में बिजली उत्पादन ठप है। यानी आंदोलन नेपाल में चल रहा है और असर बिहार और यूपी में है।

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  • Web Title: बिहार-यूपी की हरियाली पर खतरा