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दिखने लगा आरक्षण का असर

बिहार की पंचायतों में महिलाओं को मिले 50 फीसदी आरक्षण का असर दिखाई पड़ने लगा है। कल तक घर में सहमी रहने वाली महिला अब लड़ रही है। बेगूसराय जिले की सावित्री अपने प्रखंड के बीडीओ से गांव के विकास का कागज मांगती है तो सीवान जिले के भगवानपुर प्रखंड की मीराुमला ग्राम पंचायत की अत्यंत पिछड़े वर्ग की वार्ड सदस्या सुन्दरपति देवी कहती हैं- ‘पटना में जब राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव से नजरं मिलाकर बात की तो मुझे लगा कि हां, अब मैं नेता बन गई हूं।’ड्ढr ड्ढr महिलाओं के जनप्रतिनिधि बनने का सबसे ज्यादा असर अस्पतालों पर पड़ा है। कई इलाकों में तो इन महिलाओं ने लिंग परीक्षण और बालिका भ्रूण हत्या के खिलाफ अभियान छेड़ रखा है। कोई गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचा रहा है तो कोई गांव वालों को समझा रहा है कि बच्चों को टीका लगवाना जरूरी है। ग्रामीण इलाकों के स्वास्थ्य केन्द्रों पर गर्भवती महिलाओं की जो भीड़ जुट रही है उसमें महिला पंचायत प्रतिनिधियों की बड़ी भूमिका है। आगाज फाउंडेशन ने देश के विभिन्न राज्यों की पंचायतों में बेहतर काम करने वाली महिलाओं का एक ब्योरा प्रकाशित किया है। इसमें बिहार की 52 महिलाओं की चर्चा है।ड्ढr ड्ढr मीराुमला ग्राम पंचायत की ही अनुसूचित जाति की वार्ड सदस्य मीरा देवी की बात सुनिये-‘मेर गांव की एक गर्भवती महिला दर्द से परशान थी। उसके घर वाले उसे बाहर नहीं ले जा रहे थे। जब मैं उसे अस्पताल ले जाने के लिए बोली तो लोग मुझपर नाराज हो गए। फिर मैंने उन्हें समझाया तब घरवाले उसे अस्पताल पहुंचाने को तैयार हुए और उस गर्भवती की जान बच गई।’ रोहतास के करहगर प्रखंड की रूपैठा पंचायत की वार्ड सदस्य नौरंगी देवी निरक्षर हैं। लेकिन उन्हें पता है कि परिवार को ठीक से चलाने के लिए महिलाओं का स्वस्थ रहना कितना जरूरी है।

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