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चीन में भी है आरुषि हत्याकांड की गूंज

नोएडा के रहस्यमय आरुषि हत्या मामले की गूंज वहां से साढ़े तीन हजार किलोमीटर दूर चीन की राजधानी में भी सुनाई दे रही है और यहां का भारतीय समुदाय अपने अपने हिसाब से इस मामले की गुत्थी सुलझाने में जुटा हुआ है। आरुषि हत्या मामले की तहकीकात और उसकी बारीकियों पर पैनी निगाह रख रहे भारतीयों के बीच इस बात पर पूरी सहमति है कि इस मामले में सबसे यादा गुनहगार पुलिस है, जिसने पेचीदा मामले को बेहद हल्केपन से लिया और सबूतों को इस हद तक नष्ट होने दिया कि असली कातिल तक पहुंच पाना उन्हें नामुमकिन लगने लगा है। बीजिंग में पिछले सप्ताह भारतीय दूतावास में विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी के लिए राजदूत निरूपमा राव ने रात्रि भोज का आयोजन किया, जिसमें भारतीय समुदाय के प्रबुद्ध लोग भी आमंत्रित थे। दो देशों के बीच की दोस्ती की नाजुक डोर पर वहां भारतीय और चीनी नेता बातचीत कर रहे थे, लेकिन कई मेजों पर आरुषि हत्या मामले की गुत्थियों पर चर्चा हो रही थी। तीन साल से रह रहे 28 वर्षीय कृष्णपाल ने तो इस मामले की पूरी फाइल तैयार कर रखी है। इंटरनेट से समाचार लेकर उन्होंने इस हत्याकांड के सारे तथ्यों का सिलसिलेवार ब्यौरा तैयार किया हुआ है। उनका कहना है कि इस मामले में हर जगह पुलिस की कोताही दिखती है। आरुषि और घर के नौकर हेमराज के कत्ल के लिए आरुषि के पिता राजेश तलवार की गिरफ्तारी के बारे में उन्होंने कहा कि हम उस पुलिस पर यकीन कैसे कर सकते हैं, जिसने हत्या वाले घर की पूरी छानबीन नहीं की और जहां पुलिस से पहले मीडिया के कैमरामैन सबूतों को रौंदते रहे। चीन की पुलिस की तहकीकात का हवाला देते हुए एक अन्य भारतीय ने कहा कि किसी भी देश की समझदार पुलिस से उम्मीद की जाती है कि वह हत्या के मौके के तमाम सबूत एकत्र करे और ऐसा मामला अदालत में ले जाए जिस पर यकीन किया जा सके। लेकिन आरुषि के मामले में पुलिस ने सात दिन बाद जब राजेश तलवार को अभियुक्त बनाया तो उसी समय ढ़ेरों नए सवाल खड़े हो गए जिनके जवाब शायद अब भी पुलिस तलाश रही हो। मुखर्जी के साथ गए पत्रकारों से भारतीय समुदाय अगर वाकई कुछ जानना चाहता था तो वह सवाल आरुषि की हत्या से जुड़ा था। वे इस मामले की कोई भी तफसील दिलचस्पी से सुनने को तैयार थे और मामले की बारीकियां उन्हें पूरी तरह याद थी।

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