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अभी चुप ही रहेंगे असंतुष्ट विधायक

बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी को हटाने के मुहिम में हार के बाद अब असंतुष्ट भाजपा विधायक कुछ समय तक रणनीतिक चुप्पी बरतेंगे। असंतुष्ट फिलहाल इसे हाई कमान का फैसला बता कर सिर माथे ले रहे हैं। प्रमुख असंतुष्ट नेता नन्द किशोर यादव ने इस संवाददाता को बताया कि परिवार के दो बच्चे आपस में लड़ रहे थे और अभिभावकों ने उनका आपस में मेल करा दिया है। ‘इसमें संतुष्ट होने का कोई सवाल नहीं है। सवाल निर्णय का है। और हाई कमांड का निर्णय शिरोधार्य है। अब विवाद समाप्त हो गया है। सब विधायक मिल कर लोकसभा चुनाव के लिए काम करंगे।’ मोदी के खिलाफ उपजे असंतोष पर भाजपा प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने माना कि विवाद दुर्भाग्यपूर्ण था। चेन्नई से उन्होंने फोन पर बताया कि असंतोष के मूल कारण दूर करने पर पार्टी गंभीरता से विचार करगी। असंतोष के मूल में बहुत सार कारण है। इनमें बहुत सार लोगों की मंत्री बनने की इच्छा भी शामिल है। लेकिन सभी विधायकों को मंत्री नहीं बनाया जा सकता। इसलिए विधायकों को समझाना बहुत आवश्यक है। विधायकों के असंतोष के अन्य कारणों के समाधान पार्टी गंभीरता से ढूं़ढ़ने का प्रयास करगी। ्र उन्होंने यह स्वीकार नहीं किया कि गुप्त मतदान का तरीका विवाद सुलझाने के लिए ठीक नहीं था। उनका कहना था कि सुशील मोदी की प्रमाणिकता पर गुप्त मतदान ने मोहर लगा दी है। अब इस बात को अधिक तूल नहीं दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सुशील कुमार मोदी दो-तीन मतों के अंतर से नहीं,बल्कि भारी बहुमत से जीते हैं। रविवार को हुआ मतदान पार्टी का अंदरूनी मामला है और इसमें कितने विधायकों ने पक्ष में मत डाले और कितनों ने विपक्ष में, इसकी घोषणा नहीं की जा सकती। भाजपा के सह-प्रवक्ता राजीव प्रताप रुडी ने दावा किया कि पूरी बैठक पारदर्शिता के साथ हुई और जो आंकड़े समाजार पत्रों में छपे हैं, वे गलत हैं। भाजपा के निर्णय पर सभी असंतुष्ट विधायकों ने भी संतोष जताया है।

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