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देश के लिए खेला आज पिला रहा पानी ि

देश के लिए जान लगा देनेवाले एक हॉकी खिलाड़ी को आज दुर्दिन का मुंह देखना पड़ रहा है। एसा और कहीं नहीं, बल्कि हाारीबाग में ही है। 1में भारतीय हॉकी टीम के सदस्य रहे विंसेंट कंडुलना आज हाारीबाग परिसदन में चपरासी की डय़ूटी बजा रहे हैं। कंडुलना गुमला के महुआटांड़ निवासी हैं। वह 70 - 80 के दशक में कई अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुके हैं। उनकी टीम ने अपने प्रदर्शन से चीनी खिलाड़ियों की हालत पस्त कर दी थी।ड्ढr विंसेंट को इस बात का गम नहीं है कि उनकेहर गोल पर जहां उन्हें अंतरराष्ट्रीय खेल जगत की वाहवाही मिलती थी, वहीं आज उन्हें छोटी प्रशंसा भी नहीं मिलती। हां कंडुलना की इस बात की ख्वाहिश जरूर है कि काश वह झारखंड के कुछ बच्चों को प्रशिक्षित कर ऐसा खिलाड़ी बना सकते, जिन्हें कभी कप-प्लेट नहीं धोना पड़े। पूछने पर वे बताते हैं कि हालांकि पिछले 25 वर्षो से उन्होंने किसी हॉकी मैच में हिस्सा नहीं लिया, लेकिन रो थोड़ी सी फुर्सत निकाल कर हॉकी स्टिक घुमा ही लेते हैं।ड्ढr 1में उन्होंने कोहिमा में आयोजित भारत-चीन मुकाबले में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए अपनी प्रतिभा से खेल जगत को चौंका दिया था। वे असम राफल्स में भी नौकरी कर चुके हैं और देश की सुरक्षा के लिए कई बार मोरचा भी संभाला है। वह बताते हैं कि घर और गांव की परिस्थितियों ने जब अचानक करवट बदली, तो सब कुछ छोड़कर उन्हें घर लौटना पड़ा। फिर वे वापस न जा सके। उसके बाद तो जिंदगी की तसवीर ही बदल गयी। दो पैसों के लिए उन्हें कुली तक का काम भी करना पड़ा। कई दिनों तक उन्होंने हाारीबाग बाजार समिति में बोर ढोये। वर्षो परिसदन में दिहाड़ी कर्मचारी की नौकरी बजायी। अंतत: बदकिस्मती पर तरस खाकर तत्कालीन उपायुक्त राहुल पुरवार ने उनकी नियुक्ित स्थायी चतुर्थवर्गीयकर्मी के रूप में नियुक्ित कर दी। ं

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