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पूर्व चीफ चास्टिस पर कार्रवाई की सिफारिश

यायपालिका के इतिहास में पहली बार किसी पूर्व प्रधान न्यायाधीश के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई है। यह न्यायाधीश हैं वाई.के. सभरवाल। केन्द्रीय सतर्कता आयोग ने न्यायमूर्ति सभरवाल पर भ्रष्टाचार और अनियमितता के आरोपों के मद्देनजर यह सिफारिश सरकार से की है।ड्ढr न्यायमूर्ति सभरवाल पर सुप्रीम कोर्ट का प्रधान न्यायाधीश रहते हुए भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। विधि मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ से इस बात की पुष्टि की ‘कैम्पेन फॉर यूडिशियल एकाउंटेबिलिटी’ और कुछ अन्य लोगों ने सतर्कता आयोग को पूर्व प्रधान न्यायाधीश के खिलाफ शिकायतों का पुलिंदा दिया था। आयोग ने ये शिकायतें जरूरी कार्रवाई के लिए मंत्रालय को भेज दी हैं। अधिकारी ने कहा कि न्यायमूर्ति सभरवाल एसे पहले प्रधान न्यायाधीश हैं,ोिनके खिलाफ आपराधिक मामले की शिकायत की गई है। वह पहले एसे प्रधान न्यायाधीश भी हैं,ोिनके खिलाफ केन्द्रीय सतर्कता आयोग नेोाँच और कार्रवाई की सिफारिश की है।ड्ढr अधिकारी ने कहा कि न्यायमूर्ति सभरवाल के खिलाफ लगे गंभीर आरोपों पर गौर कियाोाएगा। आरोप लगाने वालों का कहना है कि प्रधान न्यायाधीश रहते हुए अपने परिवारीानों के व्यापारिक हितों के लिए न्यायमूर्ति सभरवाल ने कई मामलों में फैसले सुनाए। इनमें दिल्ली के व्यापारिक प्रतिष्ठानों की सीलिंग का मामला भी है।ोब सुप्रीम कोर्ट ने सीलिंग का आदेश दिया था, उस समय न्यायमूर्ति सभरवाल के साथ ही सरकारी बंगले में रहने वाले उनके बेटे शॉपिंग मॉल बनाने वालों से समझौता कर रहे थे। आरोप है कि सीलिंग का आदेश मॉल मालिकों को फायदा दिलाने के लिए दिया गया। हालाँकि न्यायमूर्ति ने पहले कई बार अपने खिलाफ लगे आरोपों को गलत बताया है लेकिन ता मामले में उनका पक्ष नहींोानाोा सका।ड्ढr न्यायमूर्ति सभरवाल के खिलाफ केन्द्रीय सतर्कता आयोग में शिकायत र्दा कराने वालों में से एक वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण का कहना है कि उनकी शिकायत में आयोग को दम दिखा। इसी कारण उसने विधि मंत्रालय से कार्रवाई करने के लिए कहा है। एसे में सीबीआई को न्यायमूर्ति के खिलाफ तुरंत भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत मामला र्दा करना चाहिए।ड्ढr विधि मंत्री हंसराा भारद्वाा के दफ्तर ने इस मुद्दे पर टिप्पणी से इनकार किया लेकिन कहा कि रिटायर होने के बाद कोई भी न्यायाधीश आम आदमी होोाता है और उसके साथ वैसा ही व्यवहार होता है। उधर, वरिष्ठ वकील रााीव धवन का कहना है कि रिटायर्डोा के खिलाफ आपराधिक मामले में कार्रवाई से संबंधित कोई बात संविधान या किसी कानून में नहीं कही गई है। एसे में तुरंत एक प्रणाली बनाईोानी चाहिए ताकि आगे एसे किसी मामले में किसी दिक्कत का सामना न करना पड़े।

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