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शहर वाले रोचा पानी संग पी रहे हैं आर्सेनिक

ामीन के नीचे का पानी भी अब सुरक्षित नहीं रहा। लखनऊ के भू-ाल में आर्सेनिक ौसे घातक रसायन मिलने की पुष्टि हुई है।ोल संस्थान के 14 टय़ूबवेलों से लिए गए पानी के नमूनों में से सात में आर्सेनिक पाया गया है। मानकनगर व आशियाना समेत शहर के कई इलाकों के भू-ाल में यहोहर मिला है। हालाँकि निरालानगर सबसे अधिक प्रभावित है। विभिन्न क्षेत्रों से लिए गए पानी के 24 नमूनों में 0.020-0.030 मिलीग्राम प्रति लीटर आर्सेनिक पाया गया। यह मात्रा सामान्य से लगभग तीन गुना यादा है। आर्सेनिक से कैंसर व एनीमिया ौसी बीमारी हो सकती हैं। कुछ लाइलाा बीमारियों के लिए भी यहोिम्मेदार है।ड्ढr उत्तर प्रदेश भू-गर्भोल विभाग ने रााधानी के पानी के नमूने नवम्बर 2007 में लिए थे।ोाँच में एलडीए कॉलोनी कानपुर रोड, विाय नगर, बेहसा बाग, सुाानपुरा व ट्रांसपोर्ट नगर के पानी में भी आर्सेनिक की बढ़ी मात्रा मिली। निरालानगर व विाय नगर को संवेदनशील घोषित किया गया है। भू-ाल विभाग ने लखनऊ समेत कई शहरों के भू-ाल की गुणवत्ता रिपोर्ट केन्द्रीय भूाल बोर्ड को सौंप दी है। वैज्ञानिकों का कहना है कि लखनऊ के पानी में आर्सेनिक से बने यौगिक ौसे-आर्सेनिक ट्राइमेथाइल आर्सेनेट, आर्सेनिक एसिड व ऑक्सीथायो आर्सेनिक एसिड मिल रहे हैं।ड्ढr इस समूह के यौगिक उन्नाव के भू-ाल में भी मिले हैं। वैसे पीाीआई के इम्यूनोलाॉी विभाग में कई मरीाों में आर्सेनिक की विषाक्तता मिली है। विभागाध्यक्ष प्रो. आरएन मिश्रा के मुताबिक मरीाों के रक्त के नमूने परीक्षण के लिए सीडीआरआई ोो गए हैं।ड्ढr आर्सेनिक की मात्रा पर वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि बारिश का पानी रिचरा न किया गया तो शहर में हालात बेहद खराब होोाएँगे क्योंकि कुछ इलाकों में आर्सेनिक व फ्लोराइड की मात्रा भू-ाल में तेाी से बढ़ रही है। उनका कहना है कि ऐसी स्थिति भू-ाल स्तर के अत्यधिक गिरने से पैदा हुई है।ड्ढr पश्चिम में पानी हो रहा विषाक्त: पेा 14

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